प्रश्नोत्तर P19-0144 · भाग 19
गुरु जी, कुटिया में बाहर से मंत्र बोलने, पाठ करने या किताब पढ़ने की मनाही क्यों है?
आत्मिक कल्याण के लिए साधना करो, पर यहां बाहरी आवाज नहीं कर सकते। अंदर से चाहे जितने मंत्र करो, जितना चिल्लाओ, जितनी क्रियाएं करनी हों करो। बाहर से बोलोगे तो आपने कोई मंत्र किया, उन्होंने कोई और — दोनों मंत्रों में टकराव होगा और राग-द्वेष हो जाएगा; पता नहीं तुम उसके देवता को पसंद करते हो या नहीं। द्वंद्व अंदर ही रहे; अंदर से करने से कई गुना ज्यादा लाभ होता है, मुख्य तो मानसिक ही है। यहां किताब पढ़ना भी मना है — यहां बस एक ही किताब पढ़ सकते हो, अपनी, स्वयं की; बहुत किताबें पढ़ लीं, अब अपनी किताब पढ़िए।
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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19