आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P19-0143 · भाग 19

गुरु जी, मेरी पत्नी ने छत के गमलों से भगवान को चढ़ाने के लिए फूल तोड़े, मैंने कहा खिले हुए ज्यादा अच्छे लगते हैं, तो उसे बहुत दुख हुआ। क्या फूल तोड़ने देना चाहिए?

मेरी कोई राय नहीं — आपको लग रहा है वहां खिले हुए ठीक हैं, उन्हें लग रहा है प्रभु के चरणों में ठीक हैं; सबकी अपनी-अपनी भक्ति है। फूल तो कभी ना कभी गिरेगा ही, वहां हमेशा खिला नहीं रहेगा, कोई ना कोई निमित्त बनेगा — तो क्या फर्क है? चाहे जैसे भी कोई कर रहा है, उसे करने दीजिए; वह उसकी स्थिति है, आप अपनी स्थिति से उसे क्यों रोकें। स्वामी विवेकानंद ने एक भक्ति में लगे व्यक्ति का भाव अपनी ऊर्जा से भक्ति से हटा दिया, तो रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें बहुत डांटा और वह विद्या भी ले ली। किसी की भावनाओं को समझो — मैंने जीवन में यही सीखा है। जाकर कहो "मां, जहां चढ़ाना है तोड़कर चढ़ाया कर" और फिर उनके चेहरे की खुशी देखना। यहां इतने लोग आते हैं, मैंने आज तक किसी को नहीं बोला कि किस मार्ग पर जाओ।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19