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प्रश्नोत्तर P19-0003 · भाग 19

गुरु जी, कई जगह संतों की वाणी के नाम पर अपनी बातें मिला दी जाती हैं, और गुरु के पैर धोकर चरणामृत पिलाया जाता है — क्या यह सही है?

उनके नाम की मोहर लगाते हैं क्योंकि वे फेमस हैं, और अपनी बना दी। जरा सोचिए — क्या गुरु नानक जी या कबीर जी ने कभी किसी को अपने पांव धोकर पिलाया? वे तो जल्दी पांव भी नहीं छुआते थे, पैर धोकर पिलाने की तो बड़ी दूर की बात। आज उनके नाम से लोग अपने पैर धो-धोकर "चरणामृत" बोलकर पिला रहे हैं और लेने वाले बोतल भर-भर के ले जाते हैं — यह अंधविश्वास की हद है, पाखंड की हद है। कबीर साहब ने कब किसी को ऐसा करने की अथॉरिटी दी?

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वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29