प्रश्नोत्तर P19-0002 · भाग 19
गुरु जी, गुरु और सतगुरु में क्या भेद है? क्या कोई सतगुरु दिखाया जा सकता है?
गुरु शब्द है। शब्द के द्वारा आप सत तक पहुंच गए तो हो गए सत, और किसी के लिए बोले तो हो गए सतगुरु — बस यही है। गुरु के द्वारा स्वयं तक पहुंचे, गुरु खत्म हुआ, सत तक पहुंचे; इसलिए सतगुरु कभी दिखाया नहीं जा सकता। आप जिन शब्दों से सत तक पहुंच गए, वह आपके लिए सतगुरु हुए; और आप भी पहुंचकर किसी और के लिए बोलोगे तो आप सतगुरु हो। जैसे शिक्षक कभी विद्यार्थी था — सीखना-सिखाना ही जीवन है। जो सत तक नहीं पहुंचा सका, झूठ तक पहुंचा रहा है, उसे सतगुरु क्यों कह रहे हो? सत तक पहुंचोगे तो भवसागर में गोते खाना बंद। गुरु शब्द है, शब्दों को लेकर चलना है, शरीर को नहीं। वहां कोई गुरु लेने नहीं आता, कोई खींचकर नहीं ले जाता — आत्मा चैतन्य है, जड़ नहीं; चैतन्य में पहुंची तो परमात्मा की यात्रा कर लेगी, चेतन (शरीर) में फंसी है तो जगत की यात्रा करेगी। तुम्हारा कर्म ही तुमको तारे, कर्म ही उभारे, कर्म ही फंसाए।
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वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29