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प्रश्नोत्तर P19-0004 · भाग 19

गुरु जी, ध्यान में कान दबाकर या बिना कानों के जो अंदर की धुन (अनहद) सुनाई देती है, वह क्या है?

हमें अभी एक ही धुन की जानकारी है — जो कान से सुनते हैं। आपने कोई गीत सुना, फिर एकांत में बिना बाजे के गुनगुनाते हो तो धुन, ढोलक, हारमोनियम सब अंदर से सुनाई देता है — क्योंकि आपके अंदर एक अनलिमिटेड मेमोरी है जो शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श जमा करती रहती है। बैठते हो तो वही चेतन-अचेतन मन में जमा हुआ रिपीट होता है, और उसी को "अनहद" बोल देते हैं — इसी में आप फंस गए। ध्यान में जो धुन सुनाई दे रही है, वह आपके अचेतन मन में जमा है, वही निकल रहा है।

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वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29