प्रश्नोत्तर P16-0107 · भाग 16
कर्म भी ऐसे किए हैं...
कोई बात नहीं, कर्म हुआ सो हुआ। अब हम कर्म भोगने के लिए भी तैयार हैं, उसके लिए पश्चाताप भी हो रहा है, और मैं धीरे-धीरे छूट जाऊंगा। देश, काल, स्थिति-परिस्थिति में कभी-कभी जो हम नहीं चाहते वह भी कर्म करना पड़ता है, कभी जो चाहते हैं वह भी करना पड़ता है। कभी हमारी उतनी समझ नहीं रहती कि इसका परिणाम इतना भयानक होगा, हम सोचते हैं अपने आप को बचा लेंगे। तो बहुत सारी स्थिति-परिस्थिति के द्वारा कर्म हो जाता है। कोई बात नहीं, कल्याण हो ही जाएगा। रत्नाकर जैसे डाकू ने कितनों को लूटा, अंगुलिमाल ने कितनों की उंगलियां काट लीं — रत्नाकर वाल्मीकि ब्रह्म समान हो गए। तुमने तो वैसा नहीं किया है ना? जब ऐसे लोगों का कल्याण हो सकता है तो आपका भी होगा। हां, ये है कि उन्होंने जब समझा तो पूरी तरह पिछला छोड़ के आगे बढ़ गए। उन्होंने ये नहीं कहा कि मैं प्रयास करूंगा; बोले अभी इसी वक्त मैं सब छोड़ता हूं, और उनका कल्याण हो गया। तो आप भी तुरंत छोड़ दो। जो हुआ वो आप भोग लोगे, काट लोगे, कोई बात नहीं। वो तैयार हो गए, और जब तैयार हुए तो तुरंत सब पिछला छोड़ दिया; गुरु ने जैसा कहा तुरंत अपना लिया। आपको मार्ग मिल गया है, अब चल पड़ो — प्लानिंग मत करो, प्रयास मत करो, चल पड़ोगे तो कल्याण हो जाएगा। ऐसे-ऐसे लोगों का कल्याण क्यों हुआ? क्योंकि जब गुरु मिला तो वो तुरंत छोड़ के चल दिए। लेकिन मैं जिज्ञासु में क्या देख रहा हूं — ये इधर समझ भी रहा है, कह भी रहा है कि मुझे जो चाहिए मिल गया, मार्ग मिल गया, लेकिन पिछला छोड़ नहीं पा रहा। तो छोड़ना नहीं चाहता। अगर तूने किसी चीज को पकड़ा है, इसका मतलब पकड़ने की ताकत है, तो उसे छोड़ने की भी ताकत है। तो जब गुरु मार्ग बता रहा है तो छोड़ दो, प्रयास मत करो। वो कह रहा है ईमानदारी, सत्कर्म, सत्संग अपना लो। ये मत कहो कि मैं ईमानदारी के लिए भी प्रयास कर रहा हूं — ऐसा ना हो प्रयास में ही जिंदगी चली जाए। जो आपके हाथ में है, उसके लिए भी प्रयास कर रहे हो, तो फिर तो आप नकली हो ना। ईमानदारी किसी और के हाथ में थोड़ी ना है।
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वीडियो: जो हुआ, सो हुआ, अब नहीं । #योगी · 2026-03-02