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प्रश्नोत्तर P16-0108 · भाग 16

मेरा मतलब था कि कर रहा हूं, चल रहा हूं, लेकिन कभी-कभार कुछ ना कुछ ऐसा हो जाता है जो नहीं होना चाहिए।

नहीं होना चाहिए ना — तो नहीं होना चाहिए। हर वक्त, हर क्षण, हर पल सचेत रहना पड़ेगा। अब पूरी तरह ईमानदारी जीवन में अपना लो। आप चाहोगे तो आपका कल्याण पक्का है, और अगर नहीं चाहोगे तो फिर कुछ नहीं होगा। किसी के प्रयास से थोड़ी ना कुछ होगा। अर्जुन ने अपना कल्याण चाहा तो कृष्ण भगवान के द्वारा हो गया; और दुर्योधन के लिए बहुत प्रयास किया, उसने नहीं चाहा तो उसका नहीं हुआ। आप अगर चाहोगे तो दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं सकती, हर ताकत आपकी सहायता करेगी। जब उस परम सत्ता से मिलने जा रहे हो, तो कौन रोक सकता है? हम ही रोक लेते हैं। अगर देश के राजा ने स्वीकार कर लिया कि चल आजा, तो क्या किसी की ताकत है कि आपको रास्ते में रोक सके? इस संसार में भी जो हमने चाहा वो पाया — पहले चाहा, जरूरत समझी, फिर उसके लिए काम किया, मेहनत की, तब पाया। तो इसके लिए भी तो मेहनत करनी पड़ेगी, काम करना पड़ेगा। यही मेहनत है — एक-एक दिन एकांत में जीना। अपना कल्याण कर लो, अब पूरी तरह लग जाओ। दूसरे से बातें करना बहुत आसान है; जब ग्राउंड में उतरते हैं फिर पता चलता है।

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वीडियो: जो हुआ, सो हुआ, अब नहीं । #योगी · 2026-03-02