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प्रश्नोत्तर P16-0106 · भाग 16

यहां एक-एक दिन निकालना मुश्किल लग रहा है। पता नहीं, कभी ऐसे माहौल में रहे ही नहीं।

यहां तो और शांति है, एकदम। मुश्किल क्यों लग रहा है? यहां तो अपने आप में होने का पूरा मौका है। इसका जवाब आप दो — यहां तो आपके लिए पूरा एकांत है, तो मुश्किल क्यों लग रहा है? ऐसा एकांत जीवन में मिला नहीं, और इतना एकांत है कि मैं अपने आप को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा हूं। जिस शांति की तलाश थी, जिस एकांत की तलाश थी, वो यहां है; अब वो बर्दाश्त नहीं हो रहा है, क्योंकि इच्छा तो थी ऐसा एकांत, ऐसी शांति मिले, लेकिन उसमें कभी जिया नहीं। जब से आप समझने लायक हुए, पहली बार ऐसा होगा, वही बर्दाश्त नहीं होता। कोई बात नहीं, उसे बर्दाश्त करो। इसी में आपका कल्याण छिपा हुआ है — यही तो बर्दाश्त करना है, अपना होना। यहां तो आप ही हो, फिर बर्दाश्त क्यों नहीं हो रहा? अपने आप को ही बर्दाश्त नहीं कर पा रहे। हम सबको बर्दाश्त कर लेते हैं, अपने आप को नहीं कर पाते। इसीलिए मैंने इस जगह पे ऐसा एकांत किया। जीवन में सबको बर्दाश्त कर लिया, लेकिन परम शांति तो आप में है। आपने जिसको बर्दाश्त किया उसने आपको यूज़ किया, आपने उसे यूज़ किया। अब आपको अपने आप में होना है — अब अपना सामना करो, अपने आप में स्थिर हो जाओ। आप देखो कि मैं क्यों नहीं बर्दाश्त कर पा रहा हूं, जबकि यही तो मुझे चाहिए था। इतने सालों तक सबके साथ मस्ती से जिया, और आज सात दिन मैं अपने आप में नहीं रह पा रहा, जबकि मुझे कुछ करना ही नहीं — तो देखो, करना कितना आसान है, लोगों का साथ कितना आसान है, और अपना साथ? इसलिए सामना करो और अपने आप से प्रश्न करो — मैं क्यों नहीं रुक पा रहा हूं? क्यों मैं भागना चाहता हूं? इसलिए तो मैंने सात दिन रखा, नहीं तो आप लोग एक-दो दिन में ही भाग जाते। सात दिन में बहुत कुछ समझ में आएगा। यहां हम कोई अपनी सेवा थोड़ी ना करवाते हैं, अपना काम खुद करते हैं; सात दिन तुम्हें तुम्हारे साथ रहने का पूरा मौका देता हूं, कि देख पाओ अपने आप को, अपनी बेचैनी को, अपनी घुटन को। यहां कुछ सोचना ही नहीं है, सारी व्यवस्थाएं हैं, बस व्यवस्था का उपयोग करके अपने साथ रहना है — और इतनी घुटन क्यों? जैसा जीवन में चाह रहे थे वैसी जगह मिली, सत्संग मिला, फिर क्यों भागना चाहता हूं? वहां रस है — रस की आदत लगी है। इतने सालों तक दुनिया में रहने में तकलीफ नहीं हुई, क्योंकि वहां कुछ बन रहा था — तुम्हारे द्वारा कोई अपने मैं को खड़ा कर रहा था, तुम किसी के द्वारा अपने मैं को खड़ा कर रहे थे। यहां ऐसा कुछ नहीं है, यहां किसी के सामने तुम्हारा मैं खड़ा ही नहीं होगा। घुटन भी एक सोच है ना। यहां यह नहीं सोचना कि भोजन कैसे बनेगा, व्यवस्था कैसे है; सिर्फ यही सोचना है कि मेरा कल्याण कैसे हो जाए। तो इसमें घुटन क्यों? अपने आप से प्रश्न करो — क्यों? पहली बार तो प्रॉब्लम आती है। देखो कि पूरा एकांत है, जंगल है, नेचर है — जैसा मैं चाहता था जीवन ने वैसा मौका दिया, फिर मैं भाग क्यों रहा हूं? मेरी आदतें ही बार-बार भगा रही हैं। लग जाओ अपने कल्याण में।

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वीडियो: जो हुआ, सो हुआ, अब नहीं । #योगी · 2026-03-02