प्रश्नोत्तर P15-0148 · भाग 15
क्या हमारा लक्ष्य निर्विचार अवस्था ही है?
नहीं, निर्विकार अवस्था। निर्विचार तो कभी हुआ ही नहीं जा सकता; निर्विकार हुआ जा सकता है, राग-द्वेष से मुक्त हुआ जा सकता है। महात्मा लोग उपलब्धि के बाद भी जब भूख लगी तो भोजन मांगे — भोजन का विचार आया तभी ना मांगे? भूख का विचार आएगा तभी तो हम भोजन मांगेंगे। तो निर्विचार नहीं हुआ जा सकता; गलत मार्ग पे ना जाओ। निर्विकार हुआ जा सकता है।
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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11