प्रश्नोत्तर P15-0147 · भाग 15
गुरु जी, क्या जीवन के सभी रस खत्म होने पर शरीर का भी त्याग करना पड़ता है? हमने कई सत्संग में सुना है कि अंत में शरीर का होना भी बंधन है।
ऐसा कुछ नहीं है। शरीर जब समय आएगा तो अपने आप छूट जाएगा। कितने आत्मज्ञानी महात्माओं ने इस शरीर में रह के काम किया। शरीर बंधन तभी तक है जब तक आप इच्छा-अपेक्षा में हो; इच्छा-अपेक्षा से मुक्त हो गए तो कोई बंधन नहीं। शरीर का सदुपयोग करोगे और निकल लोगे।
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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11