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प्रश्नोत्तर P9-0014 · भाग 9

जिसके साथ मैं हूं, उसके अंदर मुझे संभालने का डर है। मैं उस पर इतना आश्रित हूं कि वह जीवन में कुछ नहीं कर पाता। गुलामी से मैं कैसे मुक्त होऊं?

हां, सामर्थ्यवान बनो, जिसके साथ हो। इतना सामर्थ्यवान बनो कि उसके अंदर जो डर है तुम्हें संभालने का, वह निकल जाए। इतना आश्रित मत रहो कि वह जीवन में कुछ कर न पाए। अगर वह चाहता है, तो आप इतने सामर्थ्यवान बनो कि उसका डर हट जाए। हमेशा सामर्थ्यवान बनने की कोशिश करो। किसी पर इतने निर्भर मत हो जाओ कि वह अगर आगे भी कुछ करना चाहे, तो जीवन में कुछ कर न पाए। हमें सामर्थ्यवान बनने की जरूरत है, और सामर्थ्यवान होने के लिए हमें मेहनत करना होगा, काम करना होगा। तो अपने आप को काबिल बनाने का प्रयास करो। आप जितनी मेहनत किसी पर आश्रित होने के लिए कर रहे हो, उतनी मेहनत अगर आप अपने आपको सामर्थ्यवान बनाने के लिए करते, तो हो जाते। गुलामी से मुक्त होने के लिए काम करो। गुलाम मत बनो। इस संसार में एक सीखने वाला है, एक सिखाने वाला। आपको किसी न किसी पर निर्भर होना ही पड़ेगा। जिस पर आप निर्भर हो, वह भी कभी किसी पर निर्भर था। यह प्रकृति का नियम है कि यहां हम एक-दूसरे के पूरक हैं। एक-दूसरे को सहारा देकर ही हम एक-दूसरे को उठा सकते हैं। अब मुझे देखना है कि अगर मैं उठना चाहता हूं, और अगर मुझे कोई आश्वासन दे रहा है, तो क्या मैं उस लायक हूं? और जो आश्वासन दे रहा है, क्या वह उठाने वाला काम मुझसे करवा रहा है? यह देखना है। क्योंकि अगर आप परमात्मा से भी प्रार्थना करोगे, तो कोई मानव ही आएगा। सीधा परमात्मा, कोई सत्ता, आकर मदद नहीं करने वाला। किसी को निमित्त बनाएगा। आप जब आश्वासन लेते हो, देते हो, तो देखो, जो आश्वासन आप ले रहे हो, क्या उसके लायक हो? वह जरूरत आपकी है। क्या उसके लिए काम कर सकते हो? यह देखो। क्योंकि यहां कुछ काम करके ही मिलेगा। फ्री में यहां कुछ नहीं मिलता। आपको कर्म करना ही पड़ेगा। यह दुनिया ही आश्वासन पर टिकी हुई है। जब आश्वासन ले रहे हो, दे रहे हो, तो आप अपनी योग्यता जांच लो उस समय। क्या मैं आश्वासन दे रहा हूं, तो मैं उस योग्य हूं? क्या मैं आश्वासन ले रहा हूं, तो मैं उस योग्य हूं कि मैं इस आश्वासन पर काम भी कर पाऊंगा? क्योंकि यहां हम एक-दूसरे के पूरक हैं। आपको एक गिलास पानी भी चाहिए, तो कुछ देर के लिए, आपका परिवार हो, चाहे कोई भी हो, रिश्ते मत देखो। एक गिलास पानी भी अगर चाहिए, तो कुछ देर के लिए वह आश्वासन देगा कि मैं ले आ रहा हूं। अब वह आएगा या नहीं आएगा, वह तो बाद में पता चलेगा। लेकिन कुछ देर के लिए आपको आश्वासन में रहना ही पड़ेगा। हमारी मृत्यु कब आ जाए, पता नहीं है, लेकिन कल का मैं प्लानिंग कर रहा हूं। मेरे जीवन का पता नहीं है कि मेरा अगले क्षण अंत हो जाए। लेकिन मैं उस आश्वासन में जी रहा हूं कि मुझे यह करना है। पक्का नहीं कि मैं कल रहूं या न रहूं। जिनसे मैं वादा कर रहा हूं, जरूरी नहीं। हो सकता है अगले क्षण मैंने प्लानिंग किया, और वह गया, और मैं मर गया। आश्वासन पर पूरी दुनिया टिकी हुई है। लेकिन जब आप आश्वासन दो और लो, तो अपनी क्षमता जांच लो। मैं आश्वासन दे रहा हूं, तो क्या उसे पूरा करने की मेरी क्षमता है? अगर आपकी क्षमता नहीं है, और सामने वाले को आपने आश्वासन दे दिया, और आपकी क्षमता नहीं है, उसने मेहनत किया, तो आप गिर जाओगे। आश्वासन देने वाला गिर जाएगा। आश्वासन देने वाले की अगर पूरी क्षमता है, और वह अपनी पूरी ताकत लगा रहा है उस आश्वासन को पूरा करने में, और सामने वाला उस पर काम नहीं कर रहा है, तो वह गिर जाएगा, और यह उठ जाएगा। देखो, एक है सीखने वाला, एक सिखाने वाला। सृष्टि यही है, दुनिया यही है। सिखाने वाला आश्वासन देता है सीखने वाले को। सिखाने वाला भी कभी उस जगह पर था। अब जिसको सीखना है, उसे देखना है कि क्या मैं उस योग्य हूं? क्या मैं सीख सकता हूं? क्या मैं कर सकता हूं? यह मेरे जीवन में जरूरत है। यह मेरे जीवन में आवश्यकता है। इसलिए कि आप अगर परमात्मा से भी प्रार्थना करो, कोई सत्ता भी है, तो वह किसी न किसी मानव रूप में ही आपके पास भेजने वाली है। तो आश्वासन देना और लेना तब तक चलेगा, जब तक आप मूल तक नहीं पहुंचोगे। आश्वासन देने और लेने में जीवन रहेगा आपका। अब मुझे देखना है कि मैं आश्वासन दे रहा हूं, और मैं आश्वासन ले रहा हूं, तो मेरी सामर्थ्य क्या है? मुझे उस पर काम करना पड़ेगा। मुझे उस पर मेहनत करना पड़ेगा। अब पता चला, सामने वाले ने आश्वासन दे दिया, लेकिन काम ही नहीं मैं कर रहा हूं, तो थोड़ी न होगा। और वह काम नहीं करवा रहा है, बस आश्वासन दे दिया, तो फिर वह भी योग्य नहीं है। क्योंकि आश्वासन देने वाला व्यक्ति अगर सामर्थ्यवान है, तो वह आपसे काम करवाएगा। फिर कहेगा कि भैया, आश्वासन तो मैंने दिया है, लेकिन सीखने के लिए आपको काम करना पड़ेगा। बातों से बात बनने वाली नहीं है। आपको मेहनत करना पड़ेगा। उस आश्वासन पर काम करना पड़ेगा। दोनों को काम करना पड़ेगा। अकेले से भी नहीं होगा। एक सीखने के लिए तैयार है, लेकिन सिखाने वाला न मिला, तो वह सीख नहीं सकता। एक सिखाने वाला तैयार है, लेकिन सीखने वाला ही न मिला, तो भी कुछ नहीं हो सकता। यहां हम एक-दूसरे के पूरक हैं। तो आश्वासन लेते और देते समय याद रखो कि मेरी सामर्थ्य क्या है। जब मैं आश्वासन दे रहा हूं, तो मैं किस लायक हूं, और मैं आश्वासन ले रहा हूं, तो मैं किस लायक हूं? क्या मैं उस पर काम कर सकता हूं?

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वीडियो: Live के प्रश्न और उत्तर स्वयं के सामर्थ को जांच कर आगे बढ़े । #योगी · 2026-06-05