प्रश्नोत्तर P7-0159 · भाग 7
रोज पांच-छह बार चक्कर आ रहा है। आत्मचिंतन नहीं होता, बस खाली सेवा ही लगती है, खाली-खाली लगता है। जो सूझता है, वही करते रहते हैं। तब क्या करें?
आत्मचिंतन का मतलब है, मैं अपने आप को कैसे निकालूं। जब और सब चीजें नहीं होतीं, कुछ भी नहीं सूझता, बस खाली लगता है, तब ठीक है, तब सेवा करो। और क्या? जिंदगी लगा दो सेवा में। ना आता है, ना जाता है, ना कुछ तंग कर रहा है। जिंदगी सेवा में लगा दो। करते हुए चले जाना है।
शरीर के हिसाब से जो सूझता है, उसमें यह देख लेना कि मेरे द्वारा किया गया कर्म उचित है या अनुचित। अपना ऐसा ना हो कि जो सूझ जाए, कर ही दें। ऐसा करोगे तो बेकार हो जाएगा। उचित वाला कर्म हमें यहां करना है।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 12 अप्रैल 2026, अपनों की कुटिया में सत्संग समझो #योगी · 2026-04-12