प्रश्नोत्तर P7-0082 · भाग 7
त्याग की क्षमता हर इंसान में नहीं होती। कोई इतना फंसा होता है कि उसे लगता है अब जीने का फायदा नहीं, और वो अपने आप को सही जगह इस्तेमाल होने के लिए तैयार ही नहीं कर पाता। समाज भी दबाव डालता है कि कुछ भी हो, वो तुम्हारा भाई है, मां-बाप हैं, चाचा हैं, परिवार है। मां-बाप और भाई भी गलत हो सकते हैं। जरूरत पड़े तो माफी मांग लेते हैं, वरना कहते हैं पुरानी बात छोड़ो। व्यक्ति उस दबाव को नहीं झेल पाता। भीड़ में जहां धोखा मिला, वहीं चला गया। अपनी जिंदगी का फैसला नहीं किया, अपने आप से प्यार नहीं किया। परिवार को कर्तव्य कहकर संभालें, तो जब परिवार ही गलत चल रहा हो, तब क्या करें?
वो तो या तो उसकी समझ पड़ जाए, या कुछ नहीं हो सकता। जैसे बुद्धि मंद हो, उसे कितना भी पढ़ाया जाए। जब प्रकृति ने दिया ही नहीं है, तो आप उसका कुछ भी नहीं कर सकते।
मैं तो कहूंगा, चाहे आप तैयार भी क्यों न हों। वो दबाव नहीं झेल पाता। मैं नहीं झेल पाता, ऐसा नहीं। वो नहीं झेल पाता।
भाई ने कहा था कि ये हमारा कर्तव्य है, परिवार को संभालो। लेकिन परिवार वैसा चले, तो प्रह्लाद ने अपने बाप का विरोध कर दिया। बेटा ही बाप के मारे जाने का कारण बना, और बेटा भक्त हो गया। आज भी उसका नाम लिया जा रहा है। किसका विरोध किया था, बताओ। अपने बाप का ही।
ये छोड़ो। बहुत दूर की बात है। मां अहिल्याबाई। महेश्वर में उन्होंने अपने बेटे को, जो गलत कर रहा था, समाज के लोगों ने शिकायत की। अपने बेटे को अपने हाथी से मरवा दिया। क्योंकि बेटा दुष्ट था। आज उन्हें मां अहिल्या का नाम दिया जाता है। इसलिए। इतना बड़ा निर्णय ले पाना। आम आदमी नहीं ले पाता।
आम आदमी, तू बेईमान है। तू बेईमान है, इसलिए निर्णय नहीं ले पा रहा। अपनी बेईमानी को अपनी समझदारी मत समझ। तू एक बेईमान व्यक्ति है। समाज इधर-उधर ले गया। तू एक बेईमान व्यक्ति है, इसलिए फैसला नहीं ले रहा। अगर तू ईमानदार व्यक्ति होता, तो अपने बेटे को भी दंड दे देता, अगर वो गलत हो गया। अगर दूसरे के बेटे को दंड दे सकते हो, तो अपने को क्यों नहीं। दूसरे को कुछ भी। अपनी बेईमानी को मत ढको। कहो, मैं एक बेईमान हूं। बेईमान हूं। बस, ताकत अपने अंदर नहीं। मैं एक बेईमान हूं, इसलिए मैं अपने परिवार को ऐसा दंड नहीं दे सकता। सीधी बात है।
जब इस कर्म पर दंड होना चाहिए, तो फिर अपने परिवार वाले भी करें, तो उन्हें भी होना चाहिए। मुझे भी होना चाहिए। हां, मुझे भी। उसी बात से।
कल ही की बात है। वहीं पर हमारी और आपकी यही बात हो रही थी। अगर मेरे द्वारा कुछ भी गलत किया हो, तो समाज के सामने आना चाहिए। क्योंकि मैं समाज के लिए काम कर रहा हूं। यही बात हो रही थी। अगर मैंने जीवन में कुछ भी ऐसा गलत किया हो, तो समाज के सामने आना चाहिए। समाज भी समझे कि मैं क्या बोल रहा हूं, क्या कर रहा हूं। आना ही चाहिए। कल ही इस विषय पर बात हो रही थी।
मैंने अपने आप को रखा। मैंने कहा, मैं विश्व के लिए काम कर रहा हूं। तो जैसा हूं, वैसा सबके सामने आना चाहिए। इसीलिए अगर मुझे गुस्सा करना होता है, तो मैं लाइव में करता हूं। मुझे किसी को भगाना है, तो मैं लाइव में भगाता हूं। नहीं तो मैं उस समय बात बोल देता। शांत माहौल करके, लाइव बंद करके, आराम से इनसे बोलता। मैं अपना नाम भी आगे नहीं करता। राज से काम करके भगा देता। ये बड़े आराम से सुन लेते। मेरा नाम भी नहीं आता।
नहीं। मैं अपने आप को पहले खड़ा करता हूं। भगाओ, ये नहीं रहे। ये तो सेवा दे रहे हैं। अगर भगाने में मैं गलत होऊंगा, तो मुझे दंड मिलेगा। इनकी स्थिति ऊपर उठेगी। क्योंकि इन्होंने आज्ञा का पालन किया है। अगर एक अधिकारी ने अपने जूनियर से कहा, गोली मार दो। अगर उसने गलत गोली मरवाई है, तो सीनियर पकड़ा जाएगा, जूनियर नहीं। क्योंकि उसे तो आज्ञा का पालन करना है। तो अगर मैं किसी को ऐसे गलत भगाऊंगा, तो इनका स्तर उड़ जाएगा, मेरा गिर जाएगा।
इसलिए जब मैं किसी को भगाता हूं, तो मैं पूरी तरह भगाने लायक रहता हूं। तभी भगाता हूं। क्योंकि ऐसे अगर आपने किसी को भगा दिया, तो आप गिर जाओगे। एकदम। मैंने इसीलिए आपसे कहा। कल हमारी ही बात हो रही थी। अगर मैंने भी कुछ ऐसा गलत किया हो, तो समाज के सामने आना चाहिए। आना ही चाहिए। क्योंकि मैं आप लोगों के लिए काम कर रहा हूं।
और मेरे जीवन में सब कुछ खुला है। मेरी लाइफ, पर्सनल लाइफ, ये आध्यात्मिक लाइफ, सब खुला हुआ है। मैं एकदम खुलकर जीता हूं। खुला हुआ है। कभी खुलेगा। अगर मैंने कहीं कवर किया हुआ है, तो मुझे पता रहता है कि मैंने कवर किया हुआ है। वो बात निकल नहीं पाती।
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