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प्रश्नोत्तर P7-0081 · भाग 7

इस मानव शरीर में आए हैं, तो कुछ न कुछ कर्म करना ही है। वो मजबूरी नहीं, जरूरत है। कर्म करते हुए अपनी समझ से देखना है कि समाज के लिए, हमारे लिए, और परिवार के लिए क्या हित है, वही करना है। इस जीवन को लगाना कहां है, और सदुपयोग कैसे हो?

मैंने कहा था, सतयोग करो, और सतयुग हो जाओ। दोनों करना पड़ेंगे। यहां सब उपयोग हो रहे हैं। कोई बचता नहीं है। ये कर्मभूमि है। आप बच ही नहीं सकते। उपयोग में सदुपयोग हो जाए, और दुरुपयोग हो, तो बंधन। अब पहले हमें डिसाइड करना है कि इस लाइफ को लगाना कहां है। अपने आपको लगाना कहां है। जहां लगा दोगे, वैसा परिणाम आपके सामने आएगा। लगाना पड़ेगा, क्योंकि ये पेट है। लगाना पड़ेगा। जाओगे, तो भी लगाना पड़ेगा। कुछ भी हो। हर समय आपका लेन-देन चालू है। सांस से ही आप ऑक्सीजन ले रहे हो, और कार्बन डाइऑक्साइड दे रहे हो। आप ये मत समझो कि आपके द्वारा लेन-देन नहीं हो रहा। हर सांस में लेन-देन हो रहा है। हर सांस में तुम दे रहे हो और ले रहे हो। सृष्टि ऐसी है। कोई ये नहीं कह सकता कि मैं केवल लूंगा। हमेशा आप दे रहे हो, और ले रहे हो। हर पल, हर क्षण। यही बात है। हम एक-दूसरे के पूरक हैं। हमें समझ बढ़ानी पड़ेगी। और अपनी लाइफ में क्लैरिटी लानी पड़ेगी, कि आखिर इन सांसों का क्या करना है। इस एनर्जी का आगे क्या करना है। इस लाइफ का करना क्या है। उपयोग कहां करें। बस वो डिसाइड हो जाएगा, तो उधर ही बढ़ने लग जाएगा। और दो ही रास्ते हैं। सदुपयोग और दुरुपयोग। उपयोग तो आपको होना ही है। मेरे हिसाब से सदुपयोग में हो जाओ।

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वीडियो: किसी को सुधारने के लिए सुधारक को कितनी मेहनत करनी पड़ती हैं ? #yogiji_ka_satsang · 2025-06-27