प्रश्नोत्तर P5-0065 · भाग 5
कैसे जानें कौन सा सवाल पूछना चाहिए? क्या परमात्मा के बारे में पूछना ठीक है?
मैं उन्हीं प्रश्नों का जवाब देता हूं जिनके उत्तर से आपके जीवन में लाभ होगा। और मैं उन प्रश्नों का जवाब नहीं देना चाहता जिनसे आपके जीवन में कोई मतलब ही नहीं है। मैं सीधा उन्हें हटा देता हूं, क्योंकि आपको लाभ ही नहीं होगा, तो मेरे जवाब देने से क्या मतलब।
आप परमात्मा के बारे में पूछो। मैं बहुत अच्छा बोल सकता हूं उसके बारे में। लेकिन मैं नहीं बोलूंगा, क्योंकि आपके जीवन में उसका अभी कोई महत्व नहीं है। आपके जीवन में अभी आपका महत्व है। जहां हो, वहां से निकालो। परमात्मा का कोई लेना देना है ही नहीं।
एक सामान्य व्यक्ति है। उसके घर में भोजन नहीं है। उसके बारे में जाकर उसके राजा के बारे में बताओ कि राजा ऐसा है, रानियां उसकी ऐसी हैं, राजमहल ऐसा है, राजा ऐसे ऐसे खाता है। तो वह दरिद्र, वह भूखा आदमी कपाल पटक देगा। उसको दो वक्त का भोजन दे दो। भूखे आदमी के जीवन में भोजन का महत्व है। राजा का कोई महत्व नहीं है। ये फूल सुंदर तभी लगते हैं जब पेट में रोटी हो। व्यक्ति हर तरीके से भरा हुआ है तो ये फूल उसको सुंदर लगते हैं। लेकिन व्यक्ति हर तरीके से खाली हो। किसी का बेटा बीमार हो और आप जाकर अच्छे से अच्छा फूल दो, क्या आपको लगता है वह फूल को महसूस कर पाएगा। उसको और दर्द देगा। तो ऐसे ही आपके जीवन में भी परमात्मा का कोई महत्व नहीं है। अभी नहीं है। उस बाप के बच्चे बीमार हैं, क्या उसके जीवन में फूल का कभी महत्व नहीं होगा। जब वह ठीक हो जाएगा, तब होगा।
जहां आप हो, जब वहां सब ठीक हो जाएगा, तब उसका भी महत्व पता चल जाएगा। तब वह फूल को महसूस कर पाएगा। कब। जब उसके बच्चे ठीक हो जाएंगे। कोई भी व्यक्ति, जिससे हम प्रेम करते हैं, अगर वह बीमार है, उस अवस्था में उसे फूल दो तो दोनों महसूस नहीं कर पाएंगे। लेकिन वह ठीक हो गया, और तब जाकर आप उसे फूल दीजिए, तब खुश भी होगा, उस फूल को महसूस कर पाएगा। तो जिस दिन आप ठीक हो गए, तो आप परमात्मा को महसूस कर पाओगे। संपन्न व्यक्ति ही परमात्मा को महसूस कर पाता है। दरिद्र नहीं। दरिद्र का मतलब खाली। इस पृथ्वी पर वही व्यक्ति परमात्मा को महसूस कर पाया है जो पूरी तरह संपन्न हो चुका है। और आप करना भी चाहो, अगर वह करना भी चाहे, इस फूल को महसूस तो नहीं कर पाएगा। उसे यही फूल घुटन देगा। तो अभी आपके जीवन में अगर मैं परमात्मा की बात करूं तो आपको घुटन देगा वह परमात्मा। आप जहां हो, जब वहां से निकल के पूरी तरह संपन्न हो जाओगे, तब आप परमात्मा को महसूस कर पाओगे। और उसका कोई भी सदस्य बीमार है तो फूल दोगे तो घुटन होगी। ठीक हो गया तो वही फूल उसे प्रसन्नता महसूस कराएगा। संपन्न हो जाओ। परमात्मा छोड़ो। पहले बीमारी को ठीक करो, तकलीफ को ठीक करो। तकलीफ में आदमी कुछ महसूस नहीं कर पाता।
भूखे आदमी को आप बोलो, चलो बगिया में घुमाता हूं। भूखा आदमी बगिया में जाकर क्या करेगा। हर तरफ भोजन ही खोजेगा। तो जहां हो, जहां तकलीफ है, जहां परेशानी है, वहां से अपने आप को निकालो। पृथ्वी पर जिन्होंने भी परमात्मा को महसूस किया है, वे संपन्न थे। उन्हें कुछ नहीं चाहिए था। तो हमें परमात्मा की बातें ही नहीं करनी चाहिए। हमें तो यह बातें करनी चाहिए कि मैं इस स्थिति में हूं, इस जगह पर मैं हूं, इस जगह को पसंद नहीं कर पा रहा हूं, मैं स्वीकार नहीं कर पा रहा हूं, मैं बहुत पीड़ित हूं इस जगह से, मानसिक रूप से जहां भी मैं हूं, वहां से निकलने का उपाय बताओ। पहले तो वहां से निकलो। भूख शांत होने पर सब अच्छा लगता है। पहले हमारी भूख शांत होनी चाहिए। गुरु भूख को शांत करता है।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 9 अगस्त 2026 · 2026-08-09