प्रश्नोत्तर P5-0056 · भाग 5
(कृष्णा, इटली) एक साल से आप इंतजार कर रहे हैं — इसके पीछे गहरा राज? यहाँ रुकूँ?
सब के सब, ये भी नहीं रुक पाते। इनको भी हवा लग जाती है। ये भी विश्राम नहीं कर रहे। पहले आराम तो करो। आत्मज्ञान तो बाद की बात है। एक बात बताओ। वो तो आपके अंदर है ना। कहाँ जाएगा? छीन लेगा? किसी की ताकत है? कहाँ जाएगा आत्मज्ञान? कोई छीन लेगा आपसे? जी तो लो जिंदगी में। कहाँ जाएगा। इतना क्या टेंशन ले रहे हो भाई। कहाँ जाएगा? नहीं। आपमें इतनी तो समझ है। इतना तो चिल्ला-चिल्ला के बोला ना, कि जब मेरे अंदर है तो जाएगा कहाँ? तो जिंदगी तो जी लूँ।
पैसे चाहिए। लेकिन आपको जिंदगी जीने से ज्यादा पैसे हो गए। बात ये है। क्योंकि ये भी नहीं समझ में आता कि कितने पैसे की एक लिमिट हो जाए। अब समझिए। समझना पड़ेगा उसके लिए। एवरेज निकाल लीजिए। भाई, हम तो हजार साल नहीं जिएँगे ना। ज्यादा से ज्यादा सौ। सौ गए तो गए, तो बहुत ज्यादा। एवरेज निकाल लो। जियो मस्त। फर्स्ट क्लास लाइफ। सोने की रोटी तो खाना नहीं है। खाना है गेहूँ की। तो एवरेज निकाल लो। लाइफ को उल्टा कर दो। अगर पैसे कम होंगे तो स्टैंडर्ड कम करते जाओ। मैं कह रहा हूँ, एवरेज निकाल लो। इतने महीने का खाऊँगा, साल का इतना, दस साल का इतना, सौ साल का इतना। तो मेरे समझ से अब कितना हो गया? आपकी उम्र कितनी हो गई है?
आप तो कहाँ ले के जा रही हो? अपने समझ की बात है। सुनिए मेरी बात। आपका तो बहुत लिखा-पढ़ी वाली बात है। अपना बहुत ढीठ बात है। एवरेज निकाल लो कि भैया, हम महीने का इतना खर्च करेंगे। और गेहूँ का, घुमा-फिरा के वही रहेगा। तो दस साल निकाल लो। अब कितने साल के हो गए? कितने साल बचे हैं? सौ साल। निकाल लो। सौ साल तो पूरा होता है। लेकिन अब चालीस, पचास, साठ, तो जितना जीना हो उससे। और जो हो गया है, उसका रोटी का जुगाड़ कर लो। और सेविंग कर लो। और खाते रहो। आराम करो। फिक्स उतना बना लो, और फिक्स खाते रहो। खत्म बात। खाओ, पियो, सो। बस। वो साधना है। आराम। आत्मज्ञान तो आपके अंदर है। कौन ले लेगा? किसी की ताकत है क्या? और किसी की ताकत है करवा देगा? इतनी बात समझ में अभी तक नहीं आई। ये तो आपके अंदर है। जब मैं विश्राम करूँगा तो मिल जाएगा। खत्म बात। क्योंकि वो मेरे अंदर है। मुझे विश्राम की जरूरत है। काम में मैं बाहर हूँ। विश्राम में अंदर हूँ। अपने आप में। बस बात खत्म।
प्राप्त हमें नहीं करना। हमें जीना है। परमात्मा को लगे कि मुझे प्राप्त कर ले, अगर उसे जरूरत हो तो कर ले। हमें नहीं प्राप्त करना है परमात्मा। भाई, मुझे जीने के लिए जिंदगी मिली है, और मैं जीना चाहता हूँ। अरे, हम कुछ और कह रहे हैं माता जी। आप कहाँ चली गईं? बात समझ में आ रही है। आत्मज्ञान हमारे में है। कहाँ जाएगा? कौन छीन लेगा? विश्राम करिए। बस। बात खत्म।
आप सोचिए ना। चिल्ला-चिल्ला के लोगों ने यही कहा ना, आपके अंदर है। तो बात खत्म। विश्राम में हम अपने आप में होते हैं। बस बात खत्म। और जब विश्राम करेंगे, सब छूट जाएगा। लोग हमें छोड़ देंगे। दो साल बाद। काम ऐसे ही काम नहीं रहे। ऐसा मेरे साथ हुआ। आप समझिए इस बात को। ऐसा मेरे साथ हुआ। मेरा सोना देख के मुझे सब छोड़ दिए। मेरा यही काम था। मेरे घर वाले बहन को बोलते थे, क्यों इनको रखे हो? और मेरा काम एक ही था, खाना-सोना। और ये भी नहीं। अगर भोजन बने तो हमसे पूछा जाए। ऐसा भी नहीं। किसी के दबाव में रहना, ऐसा भी नहीं। डाँटना भी। अच्छा भोजन नहीं होगा तो नींद कैसे अच्छी होगी? ऐसा नहीं कि उनके दबाव में रहना, कि खा रहा हूँ। भोजन बनना है तो मेरे से पूछ के। उसके आदमी को चाय चाहिए। दो बजे रात को, महाराज जी चाय पियोगे क्या? हम कहे, नहीं। आप बोलते हो तो चलो। उसको पीना है, बोलता था मुझसे। और अगर मैं बोलूँ तो वो बनाएगी, नहीं तो नहीं बनाएगी। बात ये थी। तो आत्मसम्मान के साथ रहना, स्वाभिमान के साथ रहना। ऐसा नहीं कि सो के खा रहे हैं। ये तो और भी कठिन कर दिया।
कमाना-धमाना नहीं है। अरे, केवल सोना, बढ़िया खाना। डाँटना भी, और सम्मान भी चाहिए। माँ बोलती भी थी कभी-कभी, संचय किया करो। बोला, देख माई, तेरा बेटा जितना पूरी जिंदगी में कमाएगा, मैं एक-आध साल में कमा के रख दूँगा। छोड़, हमें खाने-सोने दे। जब लगेगा मुझे कमाना है, तो एक साल में कमा के रख देंगे। आप समझिए इस बात को आप लोग। आप एक लिस्ट बनाइए। मंथली आपका कितना है, एवरेज निकाल लीजिए। और आप जितनी आयु है, मिला-जुला के सौ साल, अस्सी साल तक जितना जीना है, आप जमा करके उसका खाइए। बस बैठ के।
रहेगा। पाँच साल हो जाए तो उसको बढ़ाइए। छोड़ दीजिए, एकदम। ऐसा भी कर सकते हो। मतलब अगर एवरेज में कमी हो रही है तो कर लीजिए। और एवरेज पक्का है, ज्यादा है, तो एकदम तुरंत छोड़ दीजिए। जाके इस्तीफा दीजिए। बस। अगर कम है तब तो करिए। लेकिन जब उससे ज्यादा है तो काहे को करोगे। अगर आपको लग रहा है, जैसे आप शिक्षक हो, आप पढ़ाते हो, और मेरे पढ़ाने से बच्चों का कल्याण होगा, तो निशुल्क पढ़ाना चालू कर दीजिए। ये मैं आपको सलाह दे रहा हूँ। कोई भी शिक्षक हो, वो निशुल्क अपना क्लास लेने लगे। वो भी विश्राम है।
मरना तो है ही इंसान को। कुछ ना कुछ तो बनेगा ही। पक्का तो कुछ भी नहीं है। अब देख लीजिए। मैं तो कहूँगा विश्राम करो। बाकी अगर ऐसा कुछ हो जाए तो वो भी करो। निष्काम करो। पैसे के लिए मत करो। एक बार सेविंग कर लो। अगर करने की इच्छा हो तो समाज कल्याण के लिए करो। विश्राम के साथ। लेकिन पैसे के लिए नहीं। समाज कल्याण भी तो गृहस्थ जीवन में तभी होगा जब आपका पेट भरा हो। एकदम। आप संपन्न होंगे तभी आप समाज कल्याण कर पाएँगे। आप ज्यादा से ज्यादा दस प्रतिशत निकाल दीजिए, कि भाई हम इसको लगा देंगे। अपनी तरफ से कोशिश करिए। जो आप कर सकते हैं, आप कर लीजिए। उसमें आपको ये भी कभी-कभी होगा कि आप हर एक को जाँच नहीं सकते। तो कई बार आपको लगेगा कि आपके पैसे खराब हो गए। तो उसके लिए आप तैयार रहिए। एकदम। तो आप अपनी लिस्ट बना दो, नहीं तो रह जाएगा।
भरते रहो, भरते रहो। एक बार भर दो। ये एक काम की नहीं है। छह महीना बाद मर गए तो लाइफटाइम कहाँ। दूसरे दिन तो मिलेगा नहीं। एक लाख किसी ने जमा किया, तो इतने साल बाद क्या होगा? इससे अच्छा तो खा लो। पता नहीं दस साल बाद कोई और खाएगा। ये लीजिए। मैंने आपको क्या बताया? फ्लैट बेचो। भाड़े पे घर लो। फिक्स करो। आराम से खाओ। मैं ये बता रहा हूँ। आप तो और मेहनत करवाना चाहती हो। मैं विश्राम के लिए बोल रहा हूँ। अगर मान लीजिए आपके पास फ्लैट है, तो उसे बेच दो। भाड़े पे घर लो। और मंथली खाओ। पैसे खत्म हो जाएँ, तो यहाँ आ जाओ। यहाँ तो आओ। मैं तो कह रहा हूँ, कोई भाई रुके। लोग भाग जाएँ तो यहाँ रुकिए ना। फंड-वंड कुछ नहीं जमा करना। यहाँ रुको ना। अच्छा, फिर यहाँ रुको ना। यहाँ ना फंड देना है, ना आपको कुछ देना है। कैलकुलेशन ना बोलिए। अभी मिला भी नहीं है। तो फिर आप यहाँ रुकिए ना। अभी वो बैठी, थोड़ा मिक्स करके, वैसे ही। तो वही तो। यहाँ तो कुछ आपको जमा नहीं करना है। बस आप रह जाओ। सब कुछ आ जाएगा। यहाँ पे भोजन, मेडिकल, सब है। सब है। देख रहे हो, सब आ के रखा है। सब यहाँ पे सब है। ठीक रहिए आप लोग यहाँ।
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वीडियो: कैसे पता चलेगा कि मुझे आत्मज्ञान हो गया है ? / योगीजी_का_सत्संग · 2025-04-18