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प्रश्नोत्तर P5-0055 · भाग 5

यहाँ क्या करें — साधना या विश्राम? लोगों को आराम की जरूरत क्यों?

ऐसा कुछ नहीं। कभी-कभी अठारह घंटे जागूँ, बीस घंटे जागूँ। कभी-कभी दिन भर सोया रहूँ। रात बस भोजन के लिए उठूँ, शरीर की जरूरत के लिए। कभी-कभी महीनों तक ऐसे। बस महीनों में सोना, बस एक ही काम रहना। उठ के खाना, नहाना, सो जाना। खाना बनाना, आना, सो जाना। बस इतना। महीनों। विचारों को मैंने कभी पकड़ा नहीं। मैंने काम किया। विचारों से कोई मतलब नहीं। विचार आएँगे, जाएँगे, हमसे क्या मतलब। नहीं लगेगा। क्या करेंगे? करना क्या है? सब तो यही कर रहे हैं, खाने के लिए। हम सो जाएँ, कोई टेंशन नहीं। आप दिन भर किसके लिए कर रहे हो? इसी के लिए। हमें तो ऐसे ही मिल रहा है। आप मेहनत करके इसी के लिए करते हो, तो हमें ऐसे ही मिल रहा है। मैं उस मौके का लाभ लूँ ना। आप दिन भर काम किए, रात को आए, खा के सोए। दिन भर काम किए किसके लिए? इसी के लिए। मुझे प्रॉपर्टी चाहिए था नहीं। संचय मुझे करना नहीं था। शादी मुझे करनी नहीं थी। और मुझे फ्री में रहना था, फ्री में भोजन था। तो मैं उसका लाभ क्यों ना लूँ? मैं क्यों मेहनत करूँ? और वो मेहनत अगर मैं करूँ, और जब मुझे उस फील्ड में जाना हो, तो किसके लिए करूँ? जरूरत क्या है? मुझे प्रॉपर्टी वगैरह चाहिए नहीं जिंदगी में। मुझे रोग भी नहीं होगा। मैं इलाज कराने के लिए कुछ रखूँ, कि मुझे बाद में रोग होने वाले हैं, ऐसा कुछ नहीं था मेरे जीवन में। तो मैं क्या करूँ? फिर मैं खूब सो लेता था। क्या खूब सोता था। मतलब मैं अपना बता रहा हूँ। मैं सुबह उठा। उठाया गया। वो भी प्यार में, चाय पी लो। चाय-टोस्ट आ गया। चाय-टोस्ट खाया। मंजन भी नहीं किया। खाया और सो गया। फिर दोपहर को उठा, भोजन के लिए गया। स्नान कर लिया। किया तो किया, नहीं किया तो फिर खाया और सो गया। नींद खूब आती थी। मैं जब चाहूँ तब सो जाऊँ। फिर शाम को नाश्ता-वास्ता, चाहे कोई भी, वड़ा पाव, कुछ भी, समोसा, जो मैं ऑर्डर दे दूँ वो बन जाए। फिर सो जाओ। फिर सात बजे, आठ बजे उठो। इच्छा हो तो चाय पी लो। फिर भोजन करो। फिर एक बजे, दो बजे फिर चाय पी लो, और फिर सो जाओ। बस यही मेरा वो था। महीनों-महीनों, दो-दो महीने ऐसे। मोबाइल भी रहा। कुछ देखना हो तो देख लेता था। इच्छा हो तो मोबाइल चला लेता था, नहीं तो रख देता था। एक-एक, दो-दो महीना लगातार पड़ा रहता। बस मात्र इतनी जगह में। वॉकिंग करने भी नहीं जाता था। बस सोना। नहाने के लिए, शौचालय के लिए उठना, बस उससे ज्यादा नहीं। दरवाजा भी नहीं छूता था। महीनों-महीनों मात्र इतनी जगह में पड़ा रहता था। मुझसे किसी से कोई मतलब नहीं। तो मैं इसीलिए कह रहा हूँ, आप लोग भी विश्राम करिए। इसलिए तो मैंने ये व्यवस्था यहाँ दी है। मुझे मिला था। मुझे भी मिला। मैंने उसे फील किया। इसीलिए कह रहा हूँ, विश्राम करिए आप लोग। आप लोग भाग रहे हो। आप इतने दिन से आए, कोई काम यहाँ बोला गया? मुझे भी नहीं बोला जाता था। मैं जहाँ रहता था, एक काम नहीं बोला जाता था। देखो, आपको किसी ने काम बोला? इसलिए आपको पूरी तरह आपके लिए छोड़ दिया होगा। आप इसका लाभ लो। खूब लाभ लो। रहो, सत्संग सुनो, खाओ, सो जाओ। सत्संग सुनो, खाओ, सो जाओ। विश्राम। आप लोगों को विश्राम की जरूरत है। आप लोग समझ नहीं पा रहे हो। आप लोगों को आराम की जरूरत है। जब से पैदा हुए तुम खट ही तो रहे हो। क्या, अध्यात्म को समझो? पहले आराम तो करो, एक-दो साल। फिर इसके बाद बात करेंगे अच्छे से। आए नहीं, कूद पड़े आत्मज्ञान में। देखो, इसमें करना-धरना कुछ नहीं है। करना कुछ नहीं है। पहले आराम कर, रुको। दो साल तक खा के सो। फिर आराम से बातचीत करेंगे। अब यहाँ पे मैंने सब व्यवस्था दे दी। एक काम नहीं करना है। यहाँ आपसे किसी से बात भी करने की जरूरत नहीं है। पूरा दरवाजा खुला है। कोई रोकने वाला नहीं, कोई टोकने वाला नहीं। बस यहाँ के सिस्टम में रहिए। खत्म बात। और सिस्टम भी आपके लिए है। सब उसी में जीते हैं। ऐसा नहीं कि किसी और के लिए और है। नहीं, सब उसी में जीते हैं। तो आप लोगों को विश्राम की जरूरत है, और आप लोग कर नहीं रहे हो। हमने तो खूब किया। हमने तो बहुत आराम किया। तो आराम की जरूरत तो है ही। आपको नहीं लगता क्या, आप लोगों को विश्राम की जरूरत है? आपने पूरा जीवन, जब से आप समझने लायक हुए, सिर्फ पैसे के लिए लगाया। पढ़ाई भी आपने इसीलिए की कि आपको पैसा कमाना है। सिर्फ पैसा, पैसा, पैसा। पागल हो गए हो। सिर्फ पैसा क्या है, बताओ? क्या लाइफ को बना दिया? क्या जिंदगी को बना दिया? सिर्फ पैसा, पैसा, पैसा, प्रॉपर्टी, पैसा, प्रॉपर्टी, पैसा। मैं तो आप लोगों को सलाह दूँगा। पहले तो आप एक-दो साल तक आराम करो। और बस एक ही काम, खाना-सोना, खाना-सोना। बस ये बहुत जरूरी है आप लोगों के लिए। विश्राम। खाना-सोना, खाना-सोना। इसीलिए मैं यहाँ लोगों को कहता हूँ, रुको। जो रुक जाओ। जो जॉब कर रहे हैं, उनके लिए ये कि केवल काम करो, तो थोड़ा-बहुत तो काम कर लो। आप अभी नहीं छोड़ना चाहते हो। लेकिन मैं कह रहा हूँ, जरा सा निकलो इससे। विश्राम की जरूरत बहुत है आप लोगों को। आप देखिए ना, जब से समझने लायक हुए, आपने शिक्षा भी किस लिए ली? क्या अपने लिए ली? पैसे के लिए। समझ में नहीं आता है आदमी को। जब बड़ा हो जाता है, मैं देखता हूँ तो समझ में नहीं आता। सब कमा रहे हैं। आपको कमाना है, तो वही। आपने अपने लिए क्या किया फिर? कुछ नहीं किया। फिर तो कम से कम सो तो लो। अरे, कैसे नहीं रहेगा? एक बात बताओ। आत्मज्ञान को छोड़ दो। आत्मज्ञान को इधर-उधर हटाओ। आराम तो कर लोगे जीवन में। क्या होगा, बताओ? एक आदमी दो साल सो ले, और एक आदमी दो साल और कमा ले। क्या कर लेगा? प्रॉपर्टी बना लेगा। नॉर्मल आदमी दो साल सो लेगा, उसके घर वाले उसको निकाल देंगे। जो आज काम करने वाला है, वह एक हफ्ते घर पर नहीं रह सकता। एक दिन नहीं रह सकता। आप सोचिए, क्या आपका जीवन इसीलिए मिला है? बस यही, कमाने के लिए। बस इसीलिए कि सुबह से शाम तक काम करना है, और फिर आकर सो जाना है। बस इसीलिए जिंदगी मिली है? उसके लिए आपको उनसे निकलना पड़ेगा। हमारे पिताजी घर पे अगर उठा देते थे, तो हम जा के जंगल में सोते थे। पक्का सोते थे। करना पड़ेगा। भाई, तुम्हारा दायरा कहाँ तक है? घर तक ना? हम जंगल में सोएँगे। नींद आती थी। सुबह उठा देते थे, चले जाते थे, बिछा लेते थे, सो जाते थे। क्योंकि नींद के साथ भी यह है कि जब सोने के लिए लेटो तो नींद नहीं आएगी। और अगर कोई काम है तो नींद बहुत आएगी। ऐसा होता है। मैं इसीलिए कह रहा हूँ। और पहली बात, पता नहीं क्या दिमाग में है, सुबह-सुबह जगाना। सुबह-सुबह जगा दिया। अरे यार, सोने तो दो भाई। आराम में है एक व्यक्ति। आराम तो करने दो। लक्ष्मी सात बजे के बाद भी आती है। छह बजे भी आती है, सात के बाद भी आती है। आप ज्यादातर देख लो, जितने सात बजे के बाद उठते हैं, उन्हीं के यहाँ पैसा है। नोट कर लो। वो उठते देर से इसलिए हैं क्योंकि उनके पास पैसा है। दस बजे, आप देखिए, जितने लोग हैं वो ज्यादातर ग्यारह-बारह बजे, आठ के बाद ही मिलेंगे, ज्यादा से ज्यादा। ब्रह्म मुहूर्त का कोई चक्कर नहीं होता। ब्रह्म मुहूर्त का बस इतना चक्कर है, साढ़े तीन से चार बजे हवा चलती है। स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है। बस इतना चक्कर है, और कुछ नहीं। जैसे ही सौ में आओगे, तुम्हें पूरा शरीर मिल जाएगा। कर्ता का अधिकार दे दिया ना। और इसी कर्ता से तुम मुक्त भी होगे। तुम ही इसी के थ्रू होकर कर-कर के देख, समझ में आ जाएगा। करने से कुछ नहीं मिलने वाला। इसीलिए तो मैं कह रहा हूँ। आप बताइए ना। हम जब से समझने लायक हुए, पढ़ाई भी की तो पैसे के लिए। पूरी जिंदगी। आप किसी से पूछिए, सत्तर साल, अस्सी साल के आदमी से, कि आपने जीवन में क्या किया, तो कहेगा गाड़ी, पैसा, मकान। बस ये लक्ष्य है। ये तो सिर्फ जरूरत थी, वो भी शरीर की। आपने अपने लिए क्या किया? जिस मकान को आप बना रहे हो, या तो कल बेचा जाएगा, या तोड़ा जाएगा, या प्रकृति तोड़ देगी। इसके लिए आपने पूरी जिंदगी लगा दी। पूरा जीवन ईंट-पत्थर के लिए, धातु के लिए, कागज के लिए। पूरा जीवन आपने लगा दिया। इसलिए आप आराम करें। मैं तो कहूँगा कम से कम एक-दो साल लगातार सोएँ। जॉब छोड़ दें। कोई एक-दो कमा के तो इतना रखे ही हैं। दो साल तक आप आराम से सोएँ। बस विश्राम करें। आराम की बहुत जरूरत है। हाँ, शरीर को नहीं। शरीर तो रात को सो, सुबह तैयार। आपको विश्राम की जरूरत है। आप इस बात को समझिए। शरीर को नहीं। शरीर को तो आप रात को सोए, सुबह तैयार, काम करवाओ। अब मैं आपकी बात कर रहा हूँ। आप बहुत ही थक चुके हैं। आपको विश्राम की जरूरत है। मैं आपकी बात कर रहा हूँ। आपको विश्राम की आवश्यकता है। शरीर को नहीं, आपको। थॉट से कुछ चिंतन मत करो। कुछ नहीं। अरे, बस सोना है। इस शरीर के द्वारा आराम करना है। बस एक मानसिक शांति। एकदम ऐसा नहीं कि आँख बंद करके सोना है। बैठना है तो अपने लिए। घूमना है तो अपने लिए। लेकिन कोई लाभ-हानि के लिए नहीं। मैं ये भी नहीं कह रहा हूँ कि आप एक बिस्तर पर सो जाओ। मतलब आप बिना मतलब के कम से कम रहो। और हो सके तो, मैं जैसे रहा, एक-दो महीने तक लगातार पड़ा रहता, इतनी जगह में, यहाँ से बाथरूम, बाथरूम से यहाँ। दरवाजा भी नहीं छूता था। कहीं नहीं जाता था। पड़ा रहता। आराम बहुत चाहिए आप लोगों को। हो सके तो एक कमरे में ही रहो। नहीं तो बाहर वाले बात करके खराब कर देंगे। कमरे में रहिए। आराम की बहुत जरूरत है। साधना नहीं। साधना नहीं करो। विश्राम करो। मैं करता था ना, तो मेरी बहन के अगल-बगल कहते थे कि ये संन्यासी हो गए, जंगल जाना चाहिए था। माता जी, साधना करके क्या करेंगी? क्या पाना है? आप कहते हो ना, संतों की साधना करो। मिला है? मैं कब कहता हूँ? मैं तो कह रहा हूँ विश्राम करो। मैं तो कह रहा हूँ सोइए, आराम करिए। पक्का आपको आराम की जरूरत है। आप इस बात को समझिए, गहराई से लीजिए। आप सोचिए ना, जब से समझ में आप आए, आप क्या कर रहे हैं? आपने क्या किया, बताइए? यही पैसा। मैं एक बात और सुनिए। शिक्षा भी आपने पैसे के लिए ली। अपने लिए नहीं। एक साठ-सत्तर साल के आदमी से पूछा जाए कि बताइए क्या है, बस वही दिखा देगा। पिताजी ने ये बनाया था। मैंने कार ले ली। ये बंगला लिया, दो बना दिए। बस बात खत्म। जिंदगी खत्म। संसाधन को लक्ष्य बना लिया। और संसाधन यूँ ही घूम रहे हैं। आज जहाँ आप घर बनाए हो, या तो आपका नाती। देखो, बाप का, दादा का आपने तोड़ा, बेचा। ऐसा आपका भी होगा, जिसको आप इतनी मेहनत से बना रहे हो। बेटा आएगा, कहेगा, इसको हटाओ, तोड़ दो। जैसे आपने किया। आप समझिए इस बात को। आपकी ये गाड़ी भंगार में जाने वाली है। आदमी कमा रहा है, उसी के तोड़ने के लिए तैयार है। वही पक्का तोड़ेगा। ये गाड़ी जितने शौक से ली, भंगार में जाएगी। एक बात बताइए। आपके घर में कोई चला जाता है, आप उसका नंबर लेते हो? तीन सौ पचास, दो सौ, महीने का भी उसके ऊपर खर्च नहीं कर सकते। चलो उसका नंबर तो है। जितने लोग उसके परिचय के हैं, संपर्क तो करेंगे। कोई बता दे, उसके घर का, परिवार का, गया। उसका नंबर कोई परिवार वाला लेता है? नंबर चला जाता है। उस आदमी के मरने के बाद हर महीने का इतना भी कोई खर्च नहीं कर सकता। भाई, ले लेते उसका नंबर। उसका जितना परिचय था, फोन आता, जवाब दे देते। संभाल लेते परिचय। तो मेरे समझ से विश्राम की बहुत जरूरत है। इसे गहराई से समझिए। और अपने आप को समय दो। बस पैसा, पैसा, पैसा। प्रॉपर्टी, पैसा, प्रॉपर्टी, पैसा। मैं आपको बता दूँ, मैं आज तक कल के लिए सोचा ही नहीं। मेरी माँ बोलती थी, संचय किया करो। बोला, माई, किसके लिए? किसके लिए? अगर निकल लिया तो खा जाएँगे सब। मैं खा जाऊँ, ये चलेगा? किसके लिए छोड़ूँ? किसके लिए संचय करें? बताओ, क्यों संचय करें? क्यों संचय करूँ? यहाँ लोग मैं देखता हूँ, मेडिकल करा के रखते हैं। अरे, हार्ट अटैक के आने पहले ही हार्ट अटैक का बनवा लेते हैं। अब आप मानसिक हार्ट अटैक के लिए तैयार हो गए। और कहा जाता है, अगर मानसिक आप सोचने लगो तो स्थिति कभी ना कभी हो जाती है। लेकिन आप देखिए ना, जिनके पास बहुत पैसा है वो भी मर गए। बात सही है। समझाने वाला भी तो मर जाएगा। बिस्तर पे लेट के क्या करेंगे? जब तक जिएँ, जी तो लो। बताओ, इतने समय से एक दिन की अपने लिए छुट्टी नहीं ले सकते। दो दिन की छुट्टी नहीं ले सकते। छुट्टी नहीं है। बस पैसा, पैसा, पैसा। क्या है उसके पीछे? पैसा क्या है? उस पैसे की प्रॉपर्टी नहीं करते। तब आते हैं लोग रिटायर के बाद। अरे, बोला, अब तो आराम करो। आपको ऐसी जगह मिल गई, एकांत मिल गया। आपको क्या चाहिए? मुझसे बोलो। जितनी मेरी योग्यता रहेगी, मैं आपको सहायता करूँगा। बस आप यहाँ आराम करिए। लेकिन लोग भाग जाते हैं। एक काम मैं किसी से नहीं करवाता। मैं अपना बर्तन माँजने से ले के, भोजन से ले के, सब करता हूँ। किसी से एक काम तक नहीं करवाता। आप जी लो, जीवंत होकर। फिर भी लोग भाग जाते हैं। पता नहीं क्या चाहिए। यहाँ मेडिकल से ले के दवा तक मैं करवाता हूँ। एक पिल्ला बीमार हो गया, अस्सी किलोमीटर जाता हूँ इलाज कराने। अगर यहाँ कोई बीमार हो जाए तो मेरी जितनी सामर्थ्य होगी, उसको इलाज कराने में लगाऊँगा। आप बीमार स्थिति में आओ तो इलाज करा के आओ। यहाँ अगर कोई बीमार हो जाए तो चाहे लाख लगे, चाहे दो लाख, जितनी अपनी सामर्थ्य रहेगी, पूरी तरह लगा दूँगा उसके लिए। एक पिल्ले का पैर खराब हो गया। मैं अस्सी किलोमीटर इलाज करवाने ले जाता हूँ। और वो आज डोलने लगा। पैर से डोलने लगा। तो मैं लोगों को कहता हूँ कि आप चिंता मत करिए। आप विश्राम करिए, आराम करो। फिर भी लोग भाग जाते हैं। कोई बात नहीं। काम करके देख लिया ना। अब कामचोर बनूँगा। कोई बात नहीं। आप इस पे चिंतन करिए। आप लोग बस पैसा, पैसा, पैसा, प्रॉपर्टी, पैसा, गाड़ी, पैसा। क्या है आपके पास, बताइए। ये जितने साठ साल के लोग बैठे हैं, पचास साल के ऊपर, बताएँ क्या किया। प्रॉपर्टी, पैसा, बच्चे। बस इतना है इनके पास। और कभी आराम नहीं किया? करो आराम। यहाँ इस पे चिंतन करिए। और कभी आराम किया तो शरीर को आराम दिया। जैसे ही ताकत आई, काम करने लगे। मतलब मैं जब एक-दो महीना रहता था ना, तो एक गिलास भी नहीं उठाता था। मेरे काम के लिए मुझे कोई बोलता ही नहीं था। ऐसा आराम करता था। उसके आराम की जगह साधना शब्द करना पड़ेगा। साधना कहने के बाद सब मान जाएँगे। नहीं। आप अपने आप को समय दो। अभी तो आराम का मतलब सोना समझ रहे हो। आप आराम करिए। जितनी नींद आए, सो लो। शरीर को कितनी नींद आएगी। खाना मिल जाता है तो शरीर में नींद आ ही जाती है। तो बस खाओ और सो। बढ़िया-बढ़िया खाओ। समोसा, एक खाया तो दो खाओ। मैंने अपना बताया। आप उस लायक रहोगे तो मैं मँगा दूँगा। पिल्लों को दूध मँगाता हूँ। आधा लीटर से चालू हुआ, चार लीटर आने लगे। जैसे-जैसे जरूरत हो रही है। छह पिल्ले हो गए, तो उनके लिए दो किलोमीटर से दूध मँगाता हूँ। आप अगर आराम करोगे, जरूरत दिखी तो मँगाऊँगा। साधना करोगे तो मँगाएँगे? देख लो। इंदु जी के लिए पिस्ता वगैरह सब मँगाया था। बादाम, पिस्ता, हमारे सामने आए थे। ऐसा नहीं है। सबको जरूरत पर देता हूँ। आपके हिसाब से अच्छा खाओ। आराम से सोओ। थोड़ा-बहुत टहलना है। मैं बता दूँ, आइसक्रीम तक आती है। इन लोगों को खिलाता हूँ। नमकीन, आइसक्रीम, सब। यहाँ नमकीन भरा हुआ है। सब जरूरत पर। ऐसे कोई खा नहीं सकता। जरूरत लगती है तब। आप खूब खाइए। बस वो ईमानदारी के ढंग से हो। बस बात खत्म। खूब खाओ। एक नहीं, दो समोसा खाओ। उससे क्या होगा? जितना खाना है उतना खाओ। इतना खाओ कि खाने के लिए कुछ ना रहे। इच्छाएँ खत्म हो जाएँ। इतना खाओ। एक इच्छा है तो चाय-समोसा खाओ। सुबह से उठो। अपने को दो दिन समय दो। खाओ। दिन भर खाओ। गोलगप्पे से ले के, पानीपूरी से ले के, भेल से ले के, एकदम पेट भर जाए। खाओ खूब। इसमें क्या हुआ? खूब खाओ। आराम की बहुत जरूरत है। बहुत जरूरत है। बाकी आपकी मर्जी। हम क्या बोल सकते हैं? हमने तो ऐसी व्यवस्था दे दी है। ये देखो, दो महीने के लिए। अब इन्हें चार दिन बाद भागना है। आए तो बोले, एक से दो महीना रहूँगा। मेरे घर वाले भी आ के अभी मिल के गए। फिर भी भागना है इनको। इन्हें आराम नहीं करना। इन्हें काम करना है। ये बढ़िया। पर कोई कमी है तुम्हें? कोई कमी नहीं है। फिर भी भाग रहे हैं। मैं इतना भी बोलता हूँ, जाते-जाते कमी तो बता दो। बोले, कोई कमी नहीं है। भाग कहाँ रहे हो? बोले, फिर आएँगे। जा क्यों रहे हो? फिर आओगे तो जा ही क्यों रहे हो? जाते-जाते मुझे कोई कमी तो बता दो। बोले, यहाँ कोई कमी नहीं है। मुझ में कमी है। तो बोला, यहीं रहो ना, कमी दूर करो। मैं आपकी सहायता करूँगा। लेकिन चले ही जाते हैं। चले ही जाते हैं। यहाँ आराम है। इसलिए यहाँ कोई टिकता नहीं। अभी तो एक साल कुटिया भी नहीं हुई। अभी सोलह मई को एक साल हो गई। यहाँ पर कोई लगातार अभी रहा ही नहीं। आते हैं, जाते हैं। जाते हैं, आते हैं। हमसे पूछ के नहीं। मूड घिसका, जा रहा हूँ। हमसे कोई नहीं पूछता, जाऊँ कि ना जाऊँ। आराम से जाना। किराया बड़ा है। जब इच्छा हो आ जाना। यहाँ रुकता ही नहीं। यहाँ विश्राम है, इसलिए। यहाँ तो विश्राम है। कंठी पहना दें, सेवक बना लें, तो खूब रुकेंगे। तब मैं कहूँगा तो जाएँगे? नहीं, नहीं जाएँगे। ये हालत है। नहीं चाहिए कंठी, और हम दे नहीं सकते। बंधन में रुकना कोई रुकना होता है क्या? यह हाल है।

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