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प्रश्नोत्तर P4-0156 · भाग 4

(वही साधिका) आपका कहना है कि सबको अपनी स्थिति पता होती है, पर हमें तो अपनी स्थिति पता नहीं होती। तब क्या करें?

जब नहीं पता है, तो आप जहां गए हो, उसको बोलो कि मेरी स्थिति से (मुझे) मार्ग बताओ — तो वो बताएगा। अगर आपको नहीं पता है, तो जिसके पास गए हो, उससे पूछो कि मेरी स्थिति के अनुसार मुझे मार्ग बताओ। दो रास्ते होते हैं — या तो आप अपनी स्थिति समझ कर पूछो, या तो (सामने वाले पर छोड़ दो)। जब सामने वाले पर छोड़ ही दिया, फिर प्रश्न नहीं खड़ा होना चाहिए — फिर आपकी स्थिति के अनुसार जैसा बताए, अपने आत्मिक कल्याण के लिए (करो)। प्रश्न खड़ा हुआ, इसका मतलब आपको फिर स्थिति का पता है, तो फिर उससे मत पूछो, आप अपनी स्थिति के अनुसार प्रश्न करो। स्थिति के अनुसार हमें चलना है। (अपनी स्थिति नहीं पता —) तो अब हम जिसके पास चले गए, पहले उसे समझ लो। जितनी आपके पास समझने की क्षमता है, अपनी ताकत लगा दो, और समझने के बाद बोलो — भाई, अब आप जैसा कहें, वैसा हम करें। अब वो जैसा कहे, करते चले जाओ; फिर वो (उसकी) जिम्मेदारी है। फिर आप उससे प्रश्न मत करना कि अभी कुछ नहीं हुआ — आपकी स्थिति अनुसार बताया है, आप करते रहो, चाहे एक साल लगे, चाहे 20 साल लगे। प्रश्न नहीं खड़ा होना चाहिए। (अगर बाद में डाउट हो —) मैंने क्या कहा? पूरी तरह जांच लो। डाउट में तो कल्याण हो ही नहीं सकता। मैं इसीलिए तो कहता हूं — खूब अच्छे तरीके से जांच लो, किसी को भी। जांचने के बाद वो जैसा कह रहा है, वैसे कर लो। बस डाउट नहीं होना चाहिए, संशय नहीं होना चाहिए। (बीच में शरीर को कुछ हो जाए तो —) अगर आपने पूरी तरह जांचने के बाद पूरी तरह उस पे छोड़ दिया, और उसके मार्गदर्शन अनुसार जो भी कह रहा है, वो आप करते रहो, तो वो जिम्मेदार होगा। लेकिन अच्छे तरीके से जांच लो — जांचने में जरा सी भी कमी-कसर मत छोड़ना, हर तरीके से उसे जांच लो।

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वीडियो: आखिर मेरा कल्याण कैसे हो ?#योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-30