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प्रश्नोत्तर P4-0143 · भाग 4

(लाइव) गुरु जी नमन। बाहर लोग जो इच्छा-अपेक्षा में हैं, वह भी एक प्रकार का भ्रमण ही है ना? जब भ्रमण पूरा हो जाएगा तो आत्मज्ञान हो जाएगा?

नहीं, भ्रमण किस भाव में कर रहे हो (वो देखना है); और 'कुछ नहीं चाहिए' में आओगे, तब जाके उपलब्धि होगी। अब जैसे इन्होंने रमण महर्षि की बात की — रमण महर्षि ने कहा कि सब भ्रम है; लेकिन रमण महर्षि जब अपनी उपलब्धि के लिए बैठे, तो बताते हैं कि उनके पैर को चूहे (कुतर गए) — वो इतना बोले उपलब्धि के बाद; उपलब्धि के पहले मेहनत तो उनकी देखो। पहुंचने के बाद लोग कह रहे हैं जगत मिथ्या है — अरे भैया, अपने को तो सत्य लग रहा है। कहने से कोई राजा बन जाएगा क्या? कहने-सुनने से कुछ नहीं होता; उसके पीछे उनकी मेहनत देखो, काम देखो। अगर रमण महर्षि ने कहा कि ये भ्रम है, तो देखो कि उस भ्रम को तोड़ने के लिए उन्होंने क्या किया है, और उन्होंने क्या करना बताया है, क्या नई खोज लेके आए आपके लिए, कि सरल तरीके से आप समझ पाओ। जैसे संत ज्ञानेश्वर जी ने ज्ञानेश्वरी (गीता का अनुवाद) किया — क्यों किया? क्या गीता नहीं थी? थी, लेकिन वो गीता लोग आने वाले समय में समझ नहीं पाते। तुलसीदास ने रामचरितमानस लिखा — क्यों? क्योंकि संस्कृत लोग नहीं पढ़ पाएंगे, समझ नहीं पाएंगे। तो महापुरुष क्या करते हैं? जैसे-जैसे समय आता है, आपके लिए और सरल, आसान तरीका निकाल देते हैं। अब इंजीनियर क्या करता है? एक कठिन रास्ता था, उसने पढ़ाई करके, इंजीनियरिंग करके एक सरल रास्ता बना दिया। पहले भी आप आ-जा रहे थे, लेकिन बहुत जटिलता, बहुत कम लोग उस रास्ते से आ-जा पा रहे थे; अब उसने इतना सरल कर दिया कि कोई भी आए-जाए। तो ऐसे महापुरुष आते हैं और सरल मार्ग ले आते हैं, ताकि तुम बहुत सरलता से पहुंच जाओ।

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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25