प्रश्नोत्तर P4-0089 · भाग 4
(लाइव) प्रणाम गुरु जी। आपने बोला था कि सब हम सोचते हैं, लेकिन मैं तो डरावना नहीं सोचता — डर के विचार मुझे क्यों आते हैं? इसका मतलब तो यह हुआ कि सोचता मैं हूं, परंतु विचार खुद आते हैं। विचार का स्रोत कौन है? यह कहां से आते हैं?
विचार का स्रोत बाहर है। आपको अगर कहीं से डर हुआ तो इसका मतलब वो जानकारी आपके पास पहले से मौजूद थी, नहीं तो डर होगा ही नहीं। अभी देखो, हम लोगों को हिरन से डर नहीं लगता, लेकिन छोटे सियार से डर लगता है, क्योंकि मुझे उसके बारे में जानकारी है ना। अब देखो, एक बच्चे को जानकारी नहीं रहती — वो सांप भी हाथ से उठा लेता है, कंकड़ भी उठा के खाने लगता है, मिट्टी भी। उसके सामने कुछ भी आ जाए, शेर भी आ जाए, तो डरेगा नहीं, उसको भी गले लगा ले, भले शेर मार दे — क्योंकि उसके अंदर डर नहीं है। डर क्यों नहीं है? उसे जानकारी नहीं है। तो अगर आपको डर का विचार आ रहा है, इसका मतलब उस डर के बारे में आपको जानकारी है। तो जानकारी हमें बाहर से मिल गई है, वो आधार-बेस है, उसी पे हम कल्पना करके सोचते हैं। मतलब विचार आपके अंदर नहीं है, वो आपको बाहर से मिला है।
जैसे मान लीजिए, आप बैठे हो, आंख बंद है, और बाजा बजा दिया जाए। अब जिस भाषा में गाना बज रहा है, आपको उस भाषा की जानकारी है, तो आपका भाव उसमें चला जाएगा। कैसे गया? सुन के। तो विचार कहां से आए? सोचने वाला अंदर, लेकिन सोचने का विचार कहां से आया? बाहर से ना। लेकिन आप बहरे हो, इंद्रियां काम नहीं कर रहीं, तब कुछ नहीं होगा। और अगर वो भाषा नहीं आती तो एक साउंड लगेगा। कहने का मतलब है, मेरे अंदर कोई विचार हमें बाहर से मिला है। जब हमें बाहर से — पांच इंद्रियों द्वारा — मिलना बंद हो जाता है, तो हम अंदर जितना इकट्ठा किए रहते हैं, उसके बारे में सोचते रहते हैं। मतलब हर वक्त हम काम ही करते रहते हैं। और ये कब तक करते रहेंगे? जब तक हमें कुछ चाहिए।
जैसे कहीं भीड़ लगी हो, आप जा रहे हो — अगर आपको वहां काम नहीं है तो भीड़ से आपको क्या मतलब? लेकिन भीड़ तब आपके लिए (परेशानी) है जब वो भीड़ जिसलिए खड़ी है, आपको भी उसी के लिए खड़ा होना है — तब कहोगे अरे यहां बड़ी भीड़ है। लेकिन वो भीड़ जिसके लिए खड़ी है, वो काम आपका है ही नहीं, आप कहीं और जा रहे हो, तो आपको भीड़ से कोई लेना-देना नहीं। लेना-देना कब है? जब आपको कोई काम हो। तो जब तक मुझे कुछ चाहिए, हमारे तरीके से चाहिए, तब तक हमारे विचार हमको परेशान करते रहते हैं। और अगर मैं जरूरत में आ गया तो विचार परेशान भी नहीं करेंगे। हमारे विचारों से हमें तभी तक परेशानी है जब तक हमें हमारे तरीके से चाहिए; और हमारे तरीके से नहीं चाहिए तो विचार तो आएंगे, परेशानी नहीं होगी।
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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25