प्रश्नोत्तर P4-0079 · भाग 4
(कुटिया में साधक, उज्जैन से) मैं 2017 में घर से एक साल के लिए निकल गया था। ओशो की विधियां (डायनामिक मेडिटेशन आदि) बहुत ऊर्जा देती थीं, उसमें मैं घबरा गया, एकांत में डर भी लगता था, फिर वापस संसार में लौटा — ना संसार का रहा, ना सन्यास का। बेचैनी, चिंता, तनाव, अनिद्रा, फिर सिगरेट-शराब भी लगी; डॉक्टर की दवाइयों के बाद मेरा दिमाग सुन्न हो गया। बहुत प्रयास किए, कई जगह पूछा। अब दिमाग सुन्न पड़ा है, कोई भावना ही नहीं उठती, शरीर में ताकत भी नहीं बची — अब क्या करूं?
तुम ही थे ना, वहां से उठे, फिर वहां कुछ देर देखे, फिर आ के यहां पानी पिया, फिर ऊपर बाथरूम गए — तो हम तुम्हें देख रहे थे अंदर से। लगे रहो। लगा के रखो।
(ताकत नहीं बची —) तो उज्जैन से यहां कैसे आए? (गाड़ी थी, आ गया —) जितना है उतना उसका सदुपयोग कर लो। यहां के नियम में जियो। रहो आराम से, यहां कोई कमी तो है नहीं; संसार छोड़ ही दिए हो। वहां (संसार में) शरीर की व्यवस्था थी, आत्मिक व्यवस्था नहीं थी ना। यहां तो शरीर के साथ आत्मिक व्यवस्था है — यहां पर सत्संग मिल रहा है, आत्मा का कल्याण करने का मार्ग मिल रहा है। तो बातें करने से अच्छा है कि आराम से यहां के नियम में जियो। संसार छोड़ ही चुके हो, फिर यहां रहो। भोजन-कपड़े की व्यवस्था सारी मैं करूंगा — ये जिम्मेदारी मेरी है। बस आपको यहां के नियम में रहना है।
(साधक ने ऊर्जा, दर्द, सपने और नींद की बात कही —) यहां कम से कम तीन महीना रहो, फिर मुझसे बात कर लो। तीन महीने अपने आप को यहां से बाहर जाने मत देना, और यहां तुम कुछ मत करना — तुम्हें भोजन मिल जाएगा; भोजन बनाने में सहयोग करना, क्योंकि आप खाओगे ना। यहां के नियम एक बार और पढ़ लेना, अच्छे से समझ लेना, और यहां के नियम में तीन महीना रहो, फिर मुझसे बात करना। यहां सारी व्यवस्था है; यहां से बाहर मत जाने देना अपने आप को, अपने शरीर को।
(बाद में गुरु जी ने इसी साधक के बारे में कहा —) अपने आप पे अनुशासन करना सीखो। नहीं चल रहे तो चलाओ। जैसे मैंने उसे कहा — तीन महीना तू रुक। तेरी अगर बुद्धि काम नहीं करती तो उज्जैन से गाड़ी चला के यहां आ जाता क्या? बुद्धि पूरी काम कर रही है। खा रहा है, शौचालय की जगह शौचालय जा रहा है, नहाने की जगह नहा रहा है। बुद्धि अगर तेरी काम नहीं करती — लैट्रिन करके पानी नहीं छूता, पागल की तरह घूमता, खाना कोई देता तो फेंक देता — तब समझता कि तेरी बुद्धि काम नहीं कर रही। अगर बुद्धि काम नहीं करती तो उजड्डता करते — शौचालय की जगह नहाते, नहाने की जगह शौचालय कर देते — तो मुझे भी लगता कि यार इसकी बुद्धि काम नहीं कर रही। ऐसा तो नहीं है ना। तो तुम्हारी बुद्धि कोई शून्य नहीं है। आराम से मेहनत करो, अपना आत्मिक कल्याण करो। नहीं तो संसार में वापस चले जाओ, वहां कुछ काम-धंधा करो और वहां से अपना आत्मिक कल्याण करो। मेरी बुद्धि सुन्न हो गई, यह हो गई — यह सब फालतू चक्कर में मत पड़ो। नहीं तो ऐसे ही बढ़िया से मलाई खाते-खाते जिंदगी चली जाएगी, बाद में नर्क ही मिलेगा।
अभी तुम पैंट पहने हो, टीशर्ट पहने हो — टीशर्ट तुम्हारा नीचे होता, पैंट ऊपर होता, या आगे का भाग पीछे होता, तब मुझे समझ में आता कि बुद्धि कुछ गड़बड़ है। ये सिर्फ आपके लिए थोड़ी कह रहा हूं, ये सबके लिए कह रहा हूं, उसमें मैं भी आता हूं। मानसिकता में यहां कुछ गड़बड़ नहीं है — एकदम समझदार हो, और कल्याण कर लो। नहीं तो यही सोचते-सोचते काल आ जाएगा और निकल लोगे। तब कहोगे — नहीं, अभी मुझे नहीं मरना है, बुद्धि काम नहीं कर रही। काल कहेगा — चलो, आ गया समय। तो मत करो ये सब। इसलिए मैंने आपको कहा — तीन महीने बाद मुझसे बात करना, पहले तीन महीना यहां नियम में रहो। और हमें किसी को सफाई देने की जरूरत नहीं है। आप सिद्ध करना चाहते हो कि बुद्धि सच में (काम नहीं कर रही) — उससे हमें क्या मिलेगा? आपके लिए मैं बोल रहा हूं — आपकी बुद्धि अच्छी है; मैं बुद्धि भ्रष्ट होने का लक्षण बता रहा हूं। अगर आपकी बुद्धि कम होती तो ऐसा होता; ऐसा नहीं है, तो बुद्धि बढ़िया है। बढ़िया खा रहे हैं, पी रहे हैं, रह रहे हैं, कपड़े पहन रहे हैं, गाड़ी से घूम रहे हैं, सबसे बातचीत कर रहे हैं — बुद्धि पूरी तरह (काम कर रही है)।
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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25