आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P3-0176 · भाग 3

(कुटिया में साधक भावुक होकर रोने लगा) बाबा, यह क्यों रोती है?

आत्मा है ना जो रोती है — अपना जीव रोता है अपने आप को छुड़ाने के लिए, कि मैं कैसे भवसागर से छूट जाऊं। वो समझ गया कि यहां कुछ नहीं है — ये बात समझ में आ गई। एक स्थिति में हंसता है, जब उसके तरीके से हो जाता है। एक स्थिति में रोता है, जब उसके तरीके से नहीं होता। एक स्थिति में रोता है कि अब समझ गया यहां कुछ नहीं है। और एक स्थिति में हंसता है जब वह छूट जाता है — वो आखिरी हंसी है। लेकिन वो तब तक रोता रहता है जब तक वो छूट नहीं पाता; और जब वो छूट जाएगा तब हंसेगा। हंसेगा इसलिए कि पकड़ने के लिए कुछ नहीं था और मैं पकड़ के बैठा था। हंसी तब आती है कि मैं जिसे छोड़ रहा था, उसे तो मैंने पकड़ा ही नहीं था; पकड़ा भी मैं किसी और के लिए था, किसी और के चक्कर में पकड़ा था। तो वो देख पाएगा कि मैंने तो कुछ पकड़ा ही नहीं था, और मैंने छोड़ने के लिए कितना प्रयास किया और पकड़ने के लिए भी कितना प्रयास किया — और पकड़ने के लिए कुछ था ही नहीं।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01