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प्रश्नोत्तर P3-0109 · भाग 3

आप जो ईमानदारी, सत्कर्म और 'कुछ नहीं चाहिए' की बात बोल रहे हैं — इसके लिए भी तो कुछ चाहिए; ईमानदारी और अच्छा कर्म भी कुछ चाहिए इसलिए कर रहे हैं? निष्काम भाव से करें तो क्या फर्क पड़ता है?

हां, फंसने के लिए इतना चाहिए कि 'कुछ नहीं चाहिए' — तभी ये फंसे। वही तो — 'कुछ नहीं चाहिए' के लिए करो ना, उसके लिए करो। 'बहुत चाहिए' में कर लिया, अब करो तो उसके लिए करो। जरूरतमंद की करो। निष्काम भाव से आप कर नहीं पाओगे। निष्काम भाव तब होगा जब सामने जरूरत रहेगी; अगर सामने वाले की जरूरत नहीं है तो कितना भी निष्काम भाव पैदा करो, होगा ही नहीं। निष्काम भाव से सेवा करना आपके बस में नहीं है, आपके बस में कुछ नहीं है। आप बस समझ लो — कुछ नहीं, और निकल लो। क्योंकि कुछ अगर समझे तो कितना समझोगे? यहां जो भी समझा जा रहा है, आप समझते-समझते वह बदल गया; आप किसी को बताने गए तो पता नहीं कितना बदल गया; आप जो देखकर गए थे वह रहा ही नहीं। इसलिए उपयोग करो और निकलो; सिद्ध मत करो कि यह है, वह है — जैसे सिद्ध किया, बदल गया; वह नाश की तरफ जा रहा है, उसके रूप का नाश हो जाएगा, परिवर्तन होगा। बुद्धिमान व्यक्ति उपयोग करता है और निकल लेता है; भटकने वाला व्यक्ति सिद्ध करता है। इस संसार में जिसकी भी आपने कीमत रखी — कुछ समय पहले जमीन इतने में बिक रही थी, आज इतने में हो गई — कम-ज्यादा होता रहता है। यह परिवर्तनशील संसार है, इसलिए उपयोग करो, निकलो — सीधी सी बात।

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वीडियो: मां नर्मदा के किनारे सत्संग _ सतगुरु क्या होता है ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-02-01