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प्रश्नोत्तर P3-0024 · भाग 3

सामर्थ्यवान परिचय नहीं बनाता; कमजोर बनाता है। सेवा में उम्मीद? सत्संग निशुल्क बनाम खर्च?

मैंने कभी सामने से परिचय बनाने का प्रयास नहीं किया; किसी ने बनाया तो हेल्प की। सामर्थ्यवान अपना काम करता है, परिचय नहीं बनाता। कमजोर हो तो परिचय न बनाओगे तो मर जाओगे — कमजोरी दूर करने के लिए बनाया। शिक्षक भी कभी विद्यार्थी था। सेवा कर रहे हो तो जिसका काम है वो जाने। मैं किसी को उम्मीद नहीं देता; पैसा भी देते हुए सोचने का मौका देता हूं। सामर्थ्य नहीं तो निशुल्क कुटिया में रहो; सत्संग कहीं करवाना हो तो आने-जाने का खर्च रखो। लाभ ले रहे हो तो सहयोग-योगदान सोचो — यही सत्कर्म। सुना-समझा रुक गए तो गिरते चले जाओगे। किया क्या — उससे स्तर उठेगा; सुनने-समझने से नहीं।

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वीडियो: आखिर ! मै खुद को किस से भरना चाहता हूं ? योगीजी_का_सत्संग · 2025-12-28