प्रश्नोत्तर P3-0023 · भाग 3
जन्म से तुलना-ट्रेनिंग मिलती है, बाहरी चीजें बराबर फिर भी खालीपन-उदासी-बोरियत रहती है — बता भी नहीं पाते क्या है। बाहर से गाड़ी-बंगला-कपड़े भर लेते हैं फिर भी काटता है। ये खालीपन क्या है, किससे भरे कि संतुष्टि आए?
जैसे बालक मां से खो जाए — जरूरत में कुछ ले लेगा, जरूरत पूरी होते ही मां के लिए छटपटाहट। व्याकुलता तभी पूरी जब मां से मिले। संसार के सारे सुख दो — फिर भी मां खोजेगा।
कुछ समय पहले यहां नहीं थे, बाद में नहीं रहेंगे — पक्का। जहां से अस्तित्व है वहां मिलने पर पूर्ति। जरूरत में बाहर से भरना चाहते हो — शरीर की जरूरत थी; मूल जहां अस्तित्व था वहां पहुंचना था। मान-लालच में नया अस्तित्व बना लिया; निर्माण में पछतावा-अशांति। समझ भी गई जरूरत और है लेकिन लिप्त छोड़ नहीं पा रहे। संयोग है तो वियोग — बाहर संसाधन कुछ समय सुख जैसे खिलौना; आखिर मां के अलावा कुछ नहीं चाहिए।
पहले बाहर से भरना बंद करो। शरीर की जरूरत पूरी करते थे तो मस्त थे; मान सम्मान में बेईमानी-चापलूसी — अब वो भी घुटन। अपूर्णता भाव छोड़ो — स्वयं पूर्ण हो; बाहर से भरना चाहते हो। मन जानत है मन मानत नहीं। अटैचमेंट-मोह दुख देगा समझते हुए भी फैलाते जा रहे। सुख लोगे तो दुख तैयार; सुख न लो तो दुख नहीं। जरूरत में जीना चालू करो — योग्यता और जरूरत दोनों समझो।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: आखिर ! मै खुद को किस से भरना चाहता हूं ? योगीजी_का_सत्संग · 2025-12-28