प्रश्नोत्तर P3-0008 · भाग 3
समझ गया कि समझ कर ही फंसा हूं और पिछले राग-बंधन छोड़ेंगे नहीं क्योंकि मैंने उनका उपयोग किया। क्या अब सिर्फ समझ से पीछा छुड़ा सकता हूं?
ईमानदारी करोगे, सत्कर्म करोगे; सत्कर्म से आशीर्वाद मिलेगा; आशीर्वाद से कोई समझ देने वाला मिलेगा कि कैसे निकलो — तब निकल पाओगे। ऐसे प्रयास करोगे नहीं निकल पाओगे, और फस जाओगे। झटके से छोड़ देते हैं तो अगले पकड़ ले जाते हैं, पहले से ज्यादा तकलीफ। अगर संभालने वाला मिल गया तो उनकी ऊर्जा काम नहीं करेगी।
जैसे बाबूलाल का परिवार विचलित हुआ — खुद सुधार नहीं पा रहा था; मैं व्यक्तिगत बात किया, शब्दों में समझ दिया कि कैसे निकले; मेरे शब्दों ने उनकी ऊर्जा हटा दी। मणिपुर से फोन — ईमानदारी-सत्कर्म बचपन से जानता था, नया नहीं; लेकिन जीवंत ऊर्जावान शब्द मिले तो अमृत लग गया। चेक था साइन नहीं थी; साइन वाला मिला तो काम बना। असली मिल जाए तो सौभागग्यशाली। अब बाहरी सामान्य प्रश्न मत पूछो — वीडियो इतने हैं; अपनी स्थिति से पूछो, अंतरात्मा से पूछो।
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वीडियो: अपूर्ण से पूर्णता की तरफ कैसे जाएं #योगी · 2026-01-10