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प्रश्नोत्तर P21-0126 · भाग 21

गुरु जी, आप कहते हैं जरूरत में जियो, पर हर सिचुएशन में मेरी जरूरत कितनी है — यह ढूंढने में मैं असफल हूं। इसे कैसे पहचानूं?

आपकी जरूरत क्या है — जैसे भोजन; कितना चाहिए और किस तरीके का चाहिए, वो आपको पता है। देखिए क्या उसका मूल्य मेरे पास है? है, तो लेकर खा लो, वो बंधन नहीं है; जब मूल्य नहीं होगा तो पेट भरने के लिए कोई ना कोई नाटक करना पड़ेगा, उसमें फंसोगे। टीशर्ट 1000 की भी है, 1 लाख की भी — योग्यता के अनुसार जरूरत, जरूरत के अनुसार योग्यता; जरूरत बना ली पर योग्यता नहीं, तो भैया नहीं चाहिए — जितना मेरे पास है उतने में जीना है। जरूरत पैदा मत करिए। फोर-व्हीलर का शौक है तो उसके लिए काम करो; उधारी, कर्जे, ब्याज में ले लोगे तो लोन भरते-भरते जिंदगी चली जाएगी — कितनों ने लोन पर घर लिया, कोरोना में आत्महत्या कर ली; 20 साल लोन ही भरोगे तो आध्यात्म में क्या आओगे। आध्यात्म तब समझ आएगा जब आप संपन्न हो जाओगे — संपन्न मतलब समझ गए कि मुझे कितने में जीना है। योग्यता से ज्यादा लोन लिया तो हर महीने पगार चाहिए, कंपनी के दबाव में जीना पड़ेगा, निकाल ना दे का डर, दबकर बात करनी पड़ेगी — पूरी ऊर्जा संकोच-दबाव में लग जाएगी, आप अपने आप में होने के लिए बढ़ ही नहीं पाओगे। बगल में 20,000 का भाड़ा है तो दो किलोमीटर पर 2000 में भी लोग रहते हैं — पहले जुटा लेते फिर लेते, तो कहीं दबते नहीं, खुलकर जीते, आत्मबल नहीं गिरता। तो अपनी जरूरत कम कीजिए, जितनी योग्यता है उतने में जीना चालू करिए, और ज्यादा चाहिए तो उसके लिए काम करिए फिर लीजिए।

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वीडियो: मुझे कहां होना है ? कलबुर्गी कर्नाटक में पुनः सत्संग 12 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-14