प्रश्नोत्तर P21-0125 · भाग 21
गुरु जी, मन बहुत चंचल रहता है, इधर-उधर भागता है — उसे कंट्रोल कैसे करें?
मोबाइल-कंप्यूटर चलाते हो — होम पेज पर रहते हो तो एरो नहीं दिखता, जैसे ही कुछ खोलते हो एरो आ जाता है; लेकिन एरो को जहां-जहां आप ले जाते हो वहीं जाता है — एरो आपको नहीं ले जाता। वैसे ही शरीर के लिए मन काम करता है — भूख लगी तो मन ने इंगित किया कि भूख लगी है, और अतीत में पांच इंद्रियों द्वारा जो ग्रहण किया है उससे बताएगा कि भोजन कहां मिल सकता है। "चाहिए" में मन काम करता है — महापुरुषों का भी मन काम करता था, भूख लगी तो भिक्षा मांगने गए। अगर आप जरूरत में जी रहे हो तो मन परेशान नहीं करेगा; जरूरत से ज्यादा, योग्यता से ज्यादा चाहिए तो मन के द्वारा दुखी हो जाओगे। मन तो स्थिर ही है — मन वहीं तक जाता है जहां तक आपने अतीत में इकट्ठा किया है और जहां तक इंद्रियां अभी महसूस कर पा रही हैं; बाहर से नहीं मिलता तो अंदर जितना है वो दिखाता है। मन ने आपको विचलित नहीं किया, आपकी आदतों ने विचलित किया है — तो अपनी आदतें छोड़िए। मन को छोड़ो, तुम देखो तुम क्या कर रहे हो, तुम्हें क्या चाहिए — बस। हजारों साल से यही बोला गया कि मन को रोको, इसलिए नई बात धीरे-धीरे समझ आएगी।
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वीडियो: मुझे कहां होना है ? कलबुर्गी कर्नाटक में पुनः सत्संग 12 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-14