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प्रश्नोत्तर P21-0115 · भाग 21

गुरु जी, मुझे कहां होना चाहिए? और यह कैसे पता चले कि मैं अभी कहां हूं?

पहले आप जहां हो वहां से अपने आप को छुड़ाओ। कैसे पता चले कि मैं कहां हूं? देखिए कि आपके जीवन में कहां से दुख है, कहां से सुख है, कहां से अशांति है, कहां से व्याकुलता, घुटन है — वहीं आप हो। और देखो वहां से खुश हो क्या — खुश हो तब तो निकल नहीं पाओगे, क्योंकि सुख में हम निकलते ही नहीं, जब दुख आएगा तभी पीछा छुड़ाना चाहेंगे। फिर देखो दुखी हूं तो क्यों हूं, उसका जिम्मेदार कौन — सामने वाला या मैं? जैसे एक रबड़ को खींचकर कहीं बांध दिया, तो वहां से छुड़ा दो तो वो अपने मूल में आ जाएगा। मैं इस शरीर के द्वारा कामनाओं-वासनाओं के चक्कर में अनेक पिंडों में, भिन्न-भिन्न रूपों में अपने आप को स्थापित कर दिया हूं — कहीं से शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श मिल रहा है; किसी की भाषा अच्छी लगती है, किसी को देखना। लेकिन मैं अभी भी अपने आप में हूं, वहां से हटा नहीं हूं। आपका किसी व्यक्ति से सीधा मोह नहीं हुआ — आपको कुछ चाहिए था, उसने दिया, आपकी योग्यता नहीं थी तो उससे मोह-आसक्ति हुई। आप उसे सीधा नहीं छोड़ सकते, क्योंकि आपने सीधा पकड़ा भी नहीं है; किसी कारणवश फंसे हो — वो कारण हटाओगे तो उसमें से निकल जाओगे। मैं अपनी जरूरत में गया, फिर मान की इच्छा, बड़ा बनने की इच्छा हो गई — ये इच्छाएं छोड़नी पड़ेंगी, तब आप उसे छोड़ पाओगे।

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वीडियो: मुझे कहां होना है ? कलबुर्गी कर्नाटक में पुनः सत्संग 12 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-14