प्रश्नोत्तर P20-0076 · भाग 20
गुरु जी, परिवार में कोई बार-बार समझाने पर भी न समझे तो हमारा कर्तव्य क्या है, और कब उसका त्याग कर देना चाहिए?
हमारे साथ कोई रह रहा है तो हमारा कर्तव्य है कि ऐसे शब्दों का प्रयोग करें जिससे वह समझ जाए। व्यक्ति की दो स्थिति होती है: एक, समझते हुए भी समझना नहीं चाहता, उसे गलत ही करना है — ऐसे व्यक्ति का त्याग ही परम सुख है। दूसरी, समझना चाहता है पर समझ नहीं पा रहा — उसे हर तरीके से समझाना परम दायित्व है, दंड-भेद-नीति कुछ भी अपनाना पड़े। पर पहले देखो कि उसमें उसका हित है, मैं अपना स्वार्थ या अहंकार तो पूरा नहीं कर रहा। पूरा देने के बाद भी न समझे, तो त्याग कर दो — जैसे श्रीकृष्ण ने दुर्योधन को बहुत समझाया, नहीं समझा तो छोड़ दिया।
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वीडियो: परिवार में मतभेद क्यों होते हैं? | एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण · 2025-07-16