प्रश्नोत्तर P2-0193 · भाग 2
जो लोग कहते हैं कि मैं इतने दिनों से चल रहा हूं, पर कहीं नहीं पहुंचा — क्या इसका मतलब वे चले ही नहीं?
ऐसा नहीं कि वे कहीं नहीं पहुंचे; जहां वे हैं, वहीं पहुंचने के लिए कर रहे थे। यहां सब चलायमान है — हर वस्तु, हर जीव कहीं न कहीं पहुंच रहा है; एक जगह कुछ नहीं रुका। कहां पहुंच रहा है? जहां के लिए चला। बीज वृक्ष के लिए चला, वृक्ष फूल-फल के लिए; जहां के लिए चला है, वहां पहुंचेगा, या लक्ष्य के रास्ते में खत्म हो जाएगा, तो अगला शरीर वहीं से मिलेगा जहां शरीर छोड़ा — जैसे लक्ष्य बनाकर जा रहे थे, रात को सोए, सुबह उठे तो यात्रा वहीं से प्रारंभ। तो यह मत कहिए कि कोई कहीं नहीं पहुंचा; आप हर पल अपने लक्ष्य की ओर पहुंच रहे हो — अब देख लो आपका लक्ष्य क्या है। ऐसा न हो कि निकला कहीं के लिए और पकड़ ली कोई और गाड़ी, और रास्ता, और लोगों से कहूं कि मैं तो यहां के लिए निकला हूं। यहां हर चीज परिवर्तनशील है, सब यात्रा कर रहे हैं; या तो ऊपर जा रहे हैं, या नीचे — जा जरूर रहे हैं।
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वीडियो: आखिर कब तक ये याद रहेगा ? #योगी · 2026-01-16