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प्रश्नोत्तर P2-0168 · भाग 2

‘जस करनी तस भोग विधाता, नरक जात तब ही पछताता’ — इसका क्या मतलब है?

जैसी करनी, जैसा कर्म है, विधाता वैसा ही फल देगा। जब आपके कर्मों का परिणाम आता है, सजा मिलती है, तब पछताते हो — यार, यह मैंने क्या कर दिया। काश उसी समय, जब कर रहे थे, तभी संभल जाते। अब कोई बात नहीं, भोग लो। इसलिए सोच-समझकर काम करो; परिणाम आपके सामने आएगा, परिणाम से कोई बचा नहीं पाएगा। इसलिए पहले आप खुद अपने आप को स्वतंत्र करो — आपने खुद अपने आप को ही गुलाम बनाकर रखा है।

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