प्रश्नोत्तर P2-0167 · भाग 2
बहुत लोग सच्ची जिज्ञासा होते हुए भी आसान रास्ता खोजते हैं — रातभर कीर्तन, भजन, परिक्रमा — और जहां भीड़ दिखी, वहीं चले जाते हैं। इतनी दुकानें, इतनी किताबें हैं कि आदमी भटकता है: कहीं ध्यान सीखा, ऊर्जा तीसरे नेत्र पर अटक गई, सिरदर्द हो गया, अवसाद आ गया; न घर के रहे न घाट के, कोई कहता है मुझे आत्मज्ञान हो गया। ऐसा व्यक्ति कैसे जल्दी पहचाने कि दिशा गलत पकड़ ली है, वह कल्पना में जा रहा है?
अगर वह प्रबल जिज्ञासु है और ईमानदार है, तो गलत जाएगा ही नहीं, जा ही नहीं सकता; क्योंकि एक से पूछने के बाद दूसरे से पूछेगा, सबकी बात मिलाएगा, ऐसे थोड़ी चल देगा। जैसे एक अमीर और एक गरीब सामान लेने जाएं — गरीब के पास पैसे नहीं, तो दुकानदार उसे नकली माल दे देगा; उसे पता भी है, फिर भी लेकर चला आएगा, क्योंकि उसकी मजबूरी थी। अमीर को नकली दोगे तो तुरंत झटक देगा, दुकानदार देने से डरेगा। कहने का मतलब — कोई भी अगर किसी के द्वारा भटकता है, तो वह भी वैसा ही है; किसी लालच में तो आया, कोई न कोई कमी उसकी वहां पूरी हो रही थी। अगर जिज्ञासु है और ईमानदार है, तो दुनिया की कोई ताकत उसे भटका नहीं सकती, क्योंकि उसे पता है कि वह किस लिए गया है; सामने वाला बोलेगा तो पता चल जाएगा कि यह कहां का रास्ता बता रहा है।
इसलिए मैं कहता हूं कि आप जिसके लिए गए हो, उसकी जानकारी आपको होनी चाहिए। जानकारी नहीं है, तो असली के पास भी पहुंच जाओगे, तो कुछ नहीं होगा। छह-सात साल के बच्चे की शादी करा दो तो क्या होगा? उसमें वह ऊर्जा जागृत ही नहीं हुई है। बीस साल का हो जाए, तब शादी का मतलब होगा। आपके अंदर ही नहीं है, तो बाहर का लेकर क्या करोगे? बिना लक्ष्य के चले हो, तो कुछ भी मिल जाए, चलेगा। लक्ष्य बनाकर भी चले हो पर खुद बेईमान हो, तो जो मिलेगा उससे काम चला लोगे — ‘अगले जन्म में लक्ष्य पर पहुंच लेंगे।’ आप एकदम जिज्ञासु हो, ईमानदार हो, तो आपके सामने ईमानदार ही टिकेगा।
प्रकृति में देखो — प्लस-प्लस, माइनस-माइनस (एक जैसे) जुड़ जाते हैं, पर विपरीत को जोड़ो तो बटन चालू करते ही ब्लास्ट हो जाएगा। भटकाने वाला और भटकने वाला, दोनों वैसे ही हैं; हम बाहर से एक पहलू देखकर कहते हैं कि इसने भटका दिया। अगर ईमानदार होगा, जिज्ञासु होगा, तो गुरु के पास ही टिकेगा; बेईमान होगा और (ईमानदार) गुरु मिल भी गया, तो क्रॉस हो जाएगा, वहां से चला जाएगा। प्रबल जिज्ञासु अगर किसी धोखे में एक दिन रुक भी गया, तो टिकेगा नहीं — प्यासा बिना प्यास बुझाए थोड़ी रुकेगा; और प्यास ही नहीं लगी, तो कहीं भी रुक जाएगा। यहां कोई किसी को भटका नहीं सकता, और न कोई किसी को उठा सकता। नशे के पदार्थ देखो — क्या दुकानदार बुला-बुलाकर देता है? लोग जानते हैं कि गलत है, परिवार अलग हो रहे हैं, फिर भी लाइन लगाते हैं। जिसकी जो जरूरत है, वह वहां पहुंच जाएगा।
तो हम जहां हैं, उसी के लायक हैं। जहां होना है, उसके लायक बनने की कोशिश करें, उसके लिए काम करें। घर में भी हर वस्तु उसके लायक जगह पर रखते हो — चप्पल की कीमत ज्यादा हो, चादर की कम, फिर भी चप्पल चप्पल की जगह ही रखोगे। हमें (अन्याय) ऐसा लगता है क्योंकि हम दोनों पहलू नहीं देख पाते; किसी को मारते हुए देखते हैं, पर वह क्यों मार रहा है, नहीं देखते। खोज में आज तक मैंने यही अनुभव किया कि कोई जहां है, जैसा भी है, उस लायक है, तभी वहां पड़ा है। आपने भी बहुत लोगों को निकालने, उनकी जिंदगी बदलने का प्रयास किया — क्या वे बदल पाए?
खोज में बहुत लोग मिले जो बस खोज की बातें करते हैं, उन्हें चाहिए कुछ और। एक जगह शिव मंदिर में एक बाबा मिले, बोले — आज तक मुझे कोई मार्ग बताने वाला नहीं मिला। मैंने कहा — अगर मिल जाए तो चलोगे? बोले — चलूंगा। मैंने मार्ग बताना शुरू किया और कहा — पक्का करना कि यह मार्ग पहुंचा देगा या नहीं; जब तक पक्का नहीं करोगे, मैं बताता रहूंगा, मेरे पास अनेक मार्ग हैं। उनकी समझ में आ गया। पूछा — बाबा, चलोगे? बोले — नहीं, चल तो नहीं पाऊंगा; मार्ग में कोई कमी नहीं है, पर मैं चलने के लायक ही नहीं हूं। मैंने कहा — चलो, इतना तो पता चल गया, नहीं तो यही कहते-कहते मर जाते कि कोई मार्ग बताने वाला नहीं मिला। जब तक बताने वाला नहीं मिलता, लगता है कि मैं तो पार हो जाऊंगा; पर जब मिल जाता है, तो ज्यादातर लोग छोड़कर भाग जाते हैं — मैदान में उतरने में दमखम लगता है।
यहां भी लोग आए, बोले — कुछ नहीं चाहिए, अब यहीं एकांत में रहेंगे। दूसरे दिन सुबह — मैं जाना चाहता हूं; यहां कोई कमी नहीं, पर अभी मुझमें कुछ कमी है, फिर आऊंगा। वह कमी है घूमने की, भटकने की; अभी शब्दों का रसपान करना है, मन भरा नहीं, बहुत कुछ कहना-सुनना है, इच्छाएं बाकी हैं। पहले दिन ऐसी त्याग की बातें करते हैं कि लगे इतने त्याग के बाद इन्हें परमात्मा क्यों नहीं मिलता; दूसरे दिन समझ में आता है कि ये त्याग की बातें करते हैं, त्याग का इन्हें पता ही नहीं है।
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