आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P19-0149 · भाग 19

गुरु जी, मैंने साक्षी भाव का अभ्यास किया — जैसे चिड़िया की आवाज आए तो साक्षी हो जाऊं। पर यह तभी काम करता है जब बैठा रहता हूं; डेली रूटीन में, चलते-दौड़ते नहीं आता। हमेशा दृष्टा कैसे रहें?

अगर आप हमेशा दृष्टा में रहना चाहते हो, तो बस योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा का त्याग कर दो — बात ही खत्म। आपको लगता है फिर आपसे छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड हो पाएगा? बिल्कुल नहीं हो पाएगा, और आप पूरी तरह सचेत हो जाओगे। मैं मूल बता रहा हूं कि गड़बड़ी कहां से हो रही है — ईमानदारी, सत्कर्म, उम्मीद, सब छोड़ो, बस योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा का त्याग करो। मतलब — जितना जेब में पैसा है उतना दुकान से सामान लो; जितना वजन उठा सकते हो उतना उठाओ। ज्यादा चाहिए तो योग्य बनो, योग्यता के लिए मेहनत करो — ज्यादा पेमेंट चाहिए तो ओवरटाइम करो। अपनी योग्यता सबको पता है, जानवरों तक को — एक कुत्ता जानता है किस पर वार करना है, किससे भागना है; गिलहरी गौरैया को भगाती है, बड़ा पक्षी गिलहरी को। बस इसे याद रखना है — इतना करना पड़ेगा, पर कितना सरल है; यही साधना है, भटकाव और दुख की बात खत्म।

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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19