प्रश्नोत्तर P19-0015 · भाग 19
गुरु जी, आप फोन पर बात क्यों नहीं करते? लाइव सुनने और कुटिया पर प्रत्यक्ष आने में क्या फर्क है?
एक दायरा होता तो कर भी लेते, दायरा तो है नहीं — एक से करूं तो सबसे करनी पड़ेगी, कितने कॉल आएंगे, फिर सत्संग ही नहीं हो पाएगा। एक काम करो — सत्संग सुनो, और बात करनी हो तो कुटिया पर आ जाओ, सीधा प्रत्यक्ष बात करो। प्रत्यक्ष में अलग ही बनता है: वहां से आप रूप और शब्द से (दो इंद्रियों से) समझ रहे हो, यहां तीन बढ़ जाती हैं — स्वाद, सुगंध, स्पर्श; पांचों इंद्रियों से समझते हो और संग भी मिल जाता है, जिससे चेतना का स्तर बढ़ता है।
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वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29