प्रश्नोत्तर P18-0200 · भाग 18
गुरु जी, संत-महात्माओं की वाणियों में परमात्मा की महिमा गाई गई है, बाइबल कहती है "इन द बिगिनिंग वाज द वर्ड" — क्या किसी ने बताया कि परमात्मा कैसा है?
आज तक परमात्मा कैसा है, यह कोई नहीं बता पाया। सबने महिमा गाई और यह बताया कि वहां तक कैसे पहुंचो। गुरु नानक देव जी ने "एक ओंकार सतनाम" लिखा — यह बताया कि ओंकार के पीछे एक ही वह सत है, यह नहीं बताया कि वह कैसा है; वह बुद्धि के काबू में नहीं। अभी तक सब यही सुन पाए कि वह बहुत बड़ा है, अनंत है, विराट है। जो शब्द से परे है, उसके बारे में शब्दों में कैसे बोला जाएगा? अब तक जितने लोगों ने कहा, बस एक ही बात कही — निर्विकार हो जाओ, आत्म दर्शन करो। ज्यादातर लोग बताएंगे "मन रोको, प्याज-लहसुन मत खाओ, निर्विचार हो जाओ" — निर्विचार कभी हुआ ही नहीं जा सकता; निर्विकार होना है।
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वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29