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प्रश्नोत्तर P18-0038 · भाग 18

गुरु जी, क्या आपने घर-परिवार छोड़ दिया? परमात्मा की खोज और सामने वाले व्यक्ति में आप किसे प्राथमिकता देते थे?

मैं जिससे बात करता, उसे इतना मूल्य देता था कि जिसे खोज रहा हूं वह परमात्मा भी आकर कहे "चलो, इसे छोड़ो", तो कहूंगा रुको, इसकी बात खत्म हो जाए तब चलूंगा। मैंने कुछ नहीं छोड़ा — लोगों ने मुझे छोड़ दिया, क्योंकि मैं बेकाम का हो गया; कुछ नहीं तो पकड़ेगा कौन। आखिर में मैं अपने आप से मिल गया, क्योंकि किसी ने पकड़ा ही नहीं। घर भी नहीं छोड़ा, मां से आज भी मिलने जाता हूं। मुझे कुछ छोड़ना, कुछ पकड़ना नहीं था — बस समझना था, जीना था। मां ने शादी को कहा तो मैंने कहा जिस दिन जरूरत होगी, कर लूंगा; मैंने किसी से एग्रीमेंट नहीं किया। संन्यासी बनने के लिए संन्यासी नहीं हुआ, समझने के लिए हुआ था — जैसे विद्यार्थी स्कूल से बाहर आकर यूनिफॉर्म उतार देता है। कपड़ा तो बस व्यवस्था के लिए है; मैं उसका सम्मान करता हूं पर धीरे-धीरे उससे भी छूट गया।

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वीडियो: योगीजी की आत्मकथा अज्ञान से ज्ञान तक खोज में कुछ अनुभव की बातें ! #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2024-08-25