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प्रश्नोत्तर P17-0150 · भाग 17

गुरु जी, आप कहते हैं दर्शन से कुछ मतलब नहीं — तो साधना में जो दर्शन और अनुभव होते हैं, वे कौन देता है? क्या वे हमारी कल्पना हैं, या रास्ते से भटकाने के लिए होते हैं?

दर्शन बहुत हो जाएंगे, अनुभव होंगे, पर वह आत्मदर्शन नहीं है, आत्मज्ञान नहीं है। "सब खेल खेले राम गोसाईं" — सारे खेल के खिलाड़ी आप ही हो: लीलाधारी, जादूगर, चमत्कार करने वाले और चमत्कार महसूस करने वाले भी। हर पल आपको चमत्कार चाहिए, बदलाव चाहिए, क्योंकि अलग हो रहा होगा तभी आप मालिक हो। भटक तो आप तभी गए जब मालिक बनना चाहा, और जब तक मालिक बनना चाहोगे, भटकते रहोगे। बस ऐसा करो कि मालिकपन का भाव छूटे — काम को काम के तरीके से कर दो, अपने तरीके से नहीं; मालिक तभी तक हो जब तक अपने तरीके से चाहते हो। काम के तरीके से करोगे तो मालिकपन अपने आप छूट जाएगा।

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