प्रश्नोत्तर P17-0149 · भाग 17
गुरु जी, नदी बहकर समुद्र में मिलती है तो उसका अस्तित्व मिट जाता है — क्या ऐसा ही होता है?
यह आपको लग रहा है कि अस्तित्व मिट जाता है, क्योंकि उसके आगे देखने की आपकी क्षमता नहीं है। आप पानी जैसा ही देखते हो और सोचते हो कि दौड़ समुद्र तक थी, यहीं खत्म हो गई — हो सकता है उसके आगे भी कहीं यात्रा हो, जिसे हम नहीं देख पा रहे। जैसे गुरु को भी हम अपने जैसा ही देखते हैं कि वह भी खाता-पीता, चलता है। मिलने के बाद क्या होता है, वह मिलने वालों को मिलने के बाद ही पता चलता है।
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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21