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प्रश्नोत्तर P17-0139 · भाग 17

गुरु जी, कभी लगता है कि यह सत्संग सुनना, यहां बैठना भी कहीं मेरी ही बनाई एक नई दुनिया, एक नई लीला तो नहीं?

हां, यह भी आपकी बनाई हुई एक दुनिया है। उस दुनिया में आप लीला करने में आगे बढ़ रहे थे, नई-नई खोज कर रहे थे; अब इस दुनिया में आप लीला से मुक्त होना चाहते हैं — यह भी एक नई लीला है। इस लीला में बैठकर स्थिर होकर आप पुरानी लीलाओं को देख रहे हो, तार-तार कर रहे हो, उनका निचोड़ देख रहे हो कि कागज के गुड्डे-गुड़िया जैसे थे। सब अपनी-अपनी दुनिया के लीलाधारी हैं।

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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21