प्रश्नोत्तर P17-0133 · भाग 17
गुरु जी, क्या यह भाव घर पर या उसी दुनिया में रहते हुए नहीं छोड़ा जा सकता?
वहां नहीं छूटेगा — वहां तो हवा ही कंपटीशन की है, भाव बन ही नहीं पाएगा, और बना भी लिया तो लोग या घर वाले ही पागल बोलेंगे। इसीलिए मैं कहता हूं एक महीने के लिए एकांत में जाओ, किसी जीवंत गुरु के सानिध्य में रहो या भ्रमण में जाओ — तभी होगा। भाव बनाने से कुछ नहीं होता: भोजन है और आप कल्पना करो कि भोजन नहीं है, रजाई है और सोचो कि नहीं है — यह नाटक है, उसमें कोई पीड़ा नहीं होती। जब प्राकृतिक रूप से वह स्थिति सामने घटेगी, तब पता चलेगा कि तुम क्या प्रतिक्रिया देते हो। जैसे शादी में आंगन में महिलाएं गालियां गाती हैं तो आनंद के माहौल में बुरा नहीं लगता, पर वही बात सड़क पर कोई कह दे तो बर्दाश्त नहीं होगा — इसलिए नाटक नहीं चलता, प्राकृतिक घटना घटनी चाहिए। इसीलिए जीवंत गुरु की शरण और भ्रमण जरूरी है।
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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21