प्रश्नोत्तर P17-0027 · भाग 17
गुरु जी, शास्त्रों में तीन अवस्थाएं बताई गई हैं — जीव, शिव और पीव। शिव को ब्रह्म अवस्था पर बताया गया और उसके बाद पीव की सर्वोच्च अवस्था। कई लोग ब्रह्म तक ही सीमित कर लेते हैं कि हमारे तो फाइनल परमात्मा हो गए — तो ब्रह्मज्ञानी पूर्ण स्थिति कैसे है?
मान तो सब आखिरी ही रहे हैं; जब वहां जाएगा तो उसे पता चल जाएगा कि इसके आगे भी कुछ है। दो व्यक्ति एक जगह खड़े हैं — एक कह रहा है 1 किलोमीटर तक आखिरी है, दूसरा कह रहा है उससे आगे भी है; 1 किलोमीटर तक तो दोनों को जाना ही पड़ेगा, उसके बाद ही पता चलेगा। जो ब्रह्म तक नहीं पहुंचे उनके लिए ब्रह्म भी संशय है — आप भरोसा करते हो इसलिए मानते हो। शिव कहो, पीव कहो, परमेश्वर कहो, परमात्मा कहो — एक ऐसी अनंत शक्ति इस ब्रह्मांड में है जो पूरे संसार पर नियंत्रण करके रखी है। अगर आप तीन अलग-अलग मानते हो, तो भी बिना ब्रह्म पार किए पारब्रह्म तक नहीं पहुंच सकते, और पारब्रह्म के बाद परम ब्रह्म। मैं तो तीनों को एक ही मानता हूं — पानी से बुलबुला है, आखिर में एक ही है; स्थिति अलग है, लेकिन पहुंचना उसी एक तक है। जीव का तो नाश होगा — पहले अपने में (स्व में) आना पड़ेगा; जो स्व में आ जाएगा वो सीधा उस तक जाएगा; जीव नहीं, आत्मा मिलेगा। इसीलिए देवता भी इस मानव शरीर को तरसते हैं — इस शरीर से ही परमात्मा से मिलना हो सकता है। मैं भी आत्मज्ञान के पहले समझता था कि आत्मज्ञान फाइनल है; जब आत्मज्ञान पर पहुंचा तो समझ आया — अब तो यात्रा की शुरुआत हुई, अभी तो स्व में स्थित हुए, अभी तो यात्रा के लायक बन रहे थे। जैसे आगे बढ़ोगे वैसे आगे का रास्ता दिखता है। डिबेट करके क्या मिलेगा? तब तक खोजते रहो जब तक मिल न जाए; किसी व्यक्ति विशेष को कभी मत पकड़ना — जैसे बीमार हो तो ठीक होने तक डॉक्टर बदलते हो। हम गुरु के पास परमात्मा के लिए गए थे, उस शरीर के लिए नहीं — पर मोहित होकर गुरुओं के बीच रह जाते हैं और लक्ष्य भूल जाते हैं। गुरु शब्द है, शरीर नहीं। जिस पर उसकी कृपा हुई है, हमें उसकी कृपा चाहिए — वाया क्यों लूं, मुझे सीधा चाहिए। गुरु भी यही चाहता है कि आपको सीधा मिला दे और बीच से हट जाए; उसने रास्ता देखा है, इसलिए बस रास्ता बता रहा है — क्योंकि जन्म-मरण के इस खेल से बाहर तो निकलना ही है। चाहे तीन समझो चाहे एक, आखिरी यात्रा परम ब्रह्म तक ही होगी, उसके पहले रुकना नहीं।
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वीडियो: आत्मज्ञानी और ब्रह्मज्ञानी में क्या भेद है | मन क्या है / #आत्मज्ञानी #ब्रह्मज्ञानी #aadhyatmik · 2024-09-04