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प्रश्नोत्तर P16-0122 · भाग 16

बेईमानी छोड़ने में बड़ी परेशानी होती है।

वही तो — क्योंकि उसमें ताकत लगी है ना, तो छोड़ने में भी ताकत लगेगी। कोई चीज आपने यहां से उठा के ताकत से वहां रखी, तो फिर वापस रखना चाहते हो तो ताकत तो चाहिए। इसलिए व्यक्ति अपने को बड़ा कमजोर पाता है। क्यों? इसलिए कि जब बेईमानी की तो अनेक लोगों ने साथ दिया, मलाई खा ली; अब आप निकलना चाहते हो तो कोई नहीं है, खुद ही सब करना है, पूरी ऊर्जा खुद लगानी पड़ रही है। पहले सबकी ऊर्जा मिल रही थी तो आसानी से बेईमानी कर ली, लेकिन जब छुड़ाना चाहते हो तो सारी ऊर्जा हट गई, आप अकेले बचे। अब निकाल कैसे पाओगे? अब एक ताकतवर इंसान ढूंढना पड़ेगा जो आपकी मदद करे — बिना मतलब के, जिसे कुछ नहीं चाहिए। ऐसा आदमी जल्दी नहीं मिलता; यहां सब अपने लाभ के चक्कर में घूम रहे हैं, जिसे कुछ चाहिए वो तो बेईमानी के लिए ही आएगा। इसलिए कठिन है। तो अब आपको एक ताकतवर आदमी की जरूरत है — उसी को कहते हैं गुरु। जिसे कुछ नहीं चाहिए, वो आपका कल्याण करने के लिए बैठा है कि आओ, हम तुम्हारी मदद करेंगे, तुम्हें छुड़ाएंगे; कोई बात नहीं, तुमसे देश-काल-स्थिति-परिस्थिति में हो गया। वह आपकी कमियों को देखते हुए भी आपको अपनाता है — एक माता-पिता और एक गुरु, यही तो सृष्टि में हैं जो आपकी कमियां देखकर भी अपनाते हैं। कमी नहीं होती तो गुरु के पास आते क्यों? और वह उसे निकालने के लिए शब्दों के द्वारा आपको आंतरिक ऊर्जा देता है, आपको पता भी नहीं चलता। शब्द तो किताबों में भी पड़े हैं, वहां क्यों नहीं काम करते? क्योंकि उनमें शब्द हैं, ऊर्जा नहीं — चेक है, साइन नहीं है। जीवंत गुरु शब्द के साथ खुद का साइन दे रहा है कि यह मेरी खोज है, जाओ पास हो जाएगा, इसे कोई रोकेगा नहीं — बस इसका उपयोग कर लेना। बिना साइन का चेक लेके घूमो तो पास होगा क्या? इसलिए जीवंत गुरु चाहिए। किसी ने आपको लेटर दिया और वो अब पद पे नहीं है, तो उसका साइन काम नहीं करेगा; जो पद पे है, वो चाहे अंगूठा ही लगा दे, वो काम करेगा — पद की गरिमा है। तो गुरु एक स्थिति है। यह मत देखो कि उसके शब्द कैसे हैं; वो उस स्थिति पर पहुंच गया है तो हो सकता है तुम्हारे लिए अज्ञानी हो, तुम्हारी भाषा में ना बोल पाए, ठेठ भाषा में बोले — तुम्हें कई भाषाओं का ज्ञान हो, पूरी गीता कंठस्थ हो — लेकिन वो उस स्थिति में जी रहा है, वो तुम्हें निकलने का मार्ग बता देगा, उसको जज मत कीजिए। देखते नहीं, पढ़ा-लिखा आदमी करोड़ की गाड़ी से जाता है और जिसे गंवार समझते हो वही उसे रास्ता बताता है। तुम्हें लगता है इससे ज्यादा ज्ञान तो मेरे पास है, ये तो गीता का एक श्लोक नहीं बोल पाते — हां, नहीं मालूम, लेकिन इतना मालूम है कि निकलोगे कैसे; वो ग्रंथ को जी चुके हैं, आपको सिर्फ मालूम है, आप जिए नहीं। गीता कहती है झूठ बोलना पाप है — आपने पढ़ लिया, फिर भी बहुत बार बोला; यही फर्क है जीने में और याद करने में। पद तो जीने वाला पाएगा, रटने वाला थोड़ी पाएगा। इसलिए कहा गया है जीवंत गुरु खोजो — देश-काल-स्थिति-परिस्थिति में सब बदल जाता है, वह आपको तरीका बताएगा, और तरीका हमेशा नया होता है। पद पर जो बैठा है, उसे खोजो।

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वीडियो: मानव जीवन की उपयोगिता क्या है ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-11-24