आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P14-0122 · भाग 14

गुरु जी, आपने जो ज्ञान दिया वो अनमोल है, बदले में हम आपको कुछ देना चाहते हैं तो आप क्यों मना करते हैं?

बदले में क्या दोगे — धन, कपड़ा, पैसा? वो मैं खा-पी के खत्म कर दूंगा। उतनी तो मेरी व्यवस्था हो जाती है; अपना कपड़ा स्वयं धो लेता हूं, एक कपड़ा कई सालों तक पहनता हूं, मेरे जीवन में कोई कमी नहीं है। ऐसी कौन सी वस्तु दोगे जो सदैव रहेगी? हर वस्तु का नाश हो जाएगा। अगर बदले में कुछ देना है, तो इस ज्ञान को लेके अपना आत्मिक कल्याण कर लो, आत्मज्ञान तक पहुंचो — तब देना हुआ। प्रेम से बातचीत कर रहे हो, प्रेम दे रहे हो — इतना कम है क्या? प्रेम कभी खत्म नहीं होता। मुझे सच में कुछ नहीं चाहिए, यह मेरा फैसला है, किसी ने थोपा नहीं; जब भी डगमगाया, मैंने अपने आप को समझाया कि तूने अव्यवस्था को स्वीकार किया है, ईमानदारी से काम करने का चुनाव किया है। मुझे कुछ बनना नहीं था — ना गृहस्थ, ना साधु, ना संत — बस करना था।

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