प्रश्नोत्तर P13-0039 · भाग 13
गुरु जी, पहले नाम जप करते थे, सिमरन-वाणी पढ़ते थे, तो अहंकार आ जाता था; काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार उसके अंदर ही चलते थे। लेकिन आपके ज्ञान को अपनाते हैं तो इनका बल क्षीण होने लगता है — यह मैंने महसूस किया; स्वभाव बदलने की कोई कोशिश भी नहीं करनी पड़ती।
जब समझ लेगा, तो कोशिश नहीं करनी है। कोशिश कर रहा है, इसका मतलब समझ में नहीं आया। जब हमारे पास ताकत है, तो मैं कोई वस्तु सीधा उठा दूंगा; कोशिश कर रहा हूं, ज्यादा बल लगा रहा हूं, तो इसका मतलब मेरी ताकत अभी उससे कम है। समझ गया, तो प्रयास खत्म। जैसे आंख पर कुछ भी आता है तो पलक अपने आप झपक जाती है, मुझे झपकाना नहीं पड़ता — ऐसे ज्ञान समझ में आ जाएगा, तो जैसे ही कुछ करने जाएगा, ज्ञान अपना काम कर देगा। अगर हम बंधनों से छूटने का प्रयास कर रहे हैं, बेईमानी छोड़कर ईमानदारी अपनाना चाहते हैं पर अपना नहीं पा रहे, तो इसका मतलब अभी पूरा समझ में नहीं आया। जिस दिन समझ में आ जाएगा, वो एकदम ईमानदार, सत्कर्मी बन जाएगा, क्योंकि इसी के लिए तेरा जन्म हुआ है।
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