प्रश्नोत्तर P12-0041 · भाग 12
हम अपने मूल में वापस क्यों नहीं जा पा रहे हैं? क्या हमारा हिसाब होना बाकी है, या हम मान नहीं छोड़ पा रहे, या रसपान नहीं छोड़ पा रहे?
हिसाब भी बाकी है और छोड़ भी नहीं पा रहे। अगर किसी ने आगे अपराध करना बंद कर दिया, तो पिछला खत्म होगा और वह निकल लेगा; लेकिन आगे अपराध करता रहा तो सजा बढ़ती रहेगी, और जब तक अपराध करेगा, नहीं निकल पाएगा। अपराध बंद करने के बाद भी तुरंत नहीं निकल पाएगा, जब तक उसका हिसाब-किताब क्लियर नहीं होगा। जिस दिन हिसाब-किताब क्लियर हो गया, उस दिन आप एक दिन भी जेल में रहना चाहो तो नहीं रखा जाएगा — तारीख के अनुसार गेट खोल दिया जाएगा। वैसे ही जिस दिन आपका हिसाब-किताब हुआ, आप एक क्षण भी इस जगत में नहीं रह सकते; आपको मूल में ही जाना पड़ेगा, चाहो या ना चाहो। और सजा पूरी नहीं हुई है, तो कितनी भी विनती-प्रार्थना करो, नहीं छोड़ा जाएगा — हर जगह सिस्टम काम करता है। इसलिए गिड़गिड़ाओ मत; ईमानदारी-सत्कर्म से जीवन जियो, सत्संग सुनो, ताकि राग-द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, मेरा और कर्ता का भाव आगे ना बने; पिछले से छूटने के लिए आत्मिक चिंतन करो और सिर्फ इंतजार करो।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 4 जनवरी 2026 #योगी · 2026-01-04