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प्रश्नोत्तर P11-0020 · भाग 11

कोई साधक पहले सब कुछ ठीक से समझकर यहां आया, फिर भी बाद में भ्रमित क्यों होता है? क्या उसके पाप कर्म हैं, या वह अभी कुछ गलत कर रहा है?

इसलिए कि जहां वह गया है, उसके बताए हुए शब्दों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहा, उसमें जी नहीं रहा; वह खुद कुछ अपना मिला रहा है। जैसे ही उसने अपना मिलाया, भ्रमित हो जाएगा, क्योंकि उसकी (गुरु की) बातें कुछ और कहेंगी और मेरी कुछ और। कोई पुराने पाप कर्म नहीं। अगर आप कहीं हो और वह कहीं, तो जरूर उसकी बातें आपसे अलग हैं, तभी तो वह वहां है और तुम यहां; वहां तक पहुंचने के लिए तुम्हें अपनी समझ छोड़नी पड़ेगी, बिना अपनी समझ छोड़े तुम वहां कभी नहीं पहुंच सकते। अगर मैं अपनी वही समझ वहां भी मिलाऊंगा, तो वहीं चला जाऊंगा जहां था, या उससे नीचे। अगर कुछ बातें विपरीत लगें, तो पूछना चाहिए कि वह कहना क्या चाहता है।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 22 फरवरी 2026 #योगी · 2026-02-22