प्रश्नोत्तर P9-0135 · भाग 9
गुरु जी, सेवा करते-करते गिरने से कैसे बचें?
जितना आपने सामने वाले को आश्वासन दिया है, उतना करो। जितना आपके सामर्थ्य में है, उतना करो। बिना मतलब किसी को झूठा आश्वासन मत दो। किसी को उम्मीद में मत बांधो। क्योंकि जब आप किसी को झूठा आश्वासन देते हो तो उसके अनेक विकल्प बंद कर देते हो। तो अब आप कुछ दिन के बाद बोलोगे, हम नहीं कर पाएंगे। तो उसे आपने कितना परेशान किया। उस परेशानी का भी तो भोग, जितना वह परेशान हुआ। क्योंकि उसने आपका इंतजार किया, महीनों, सालों, जितना आपने इंतजार कराया, दिनों, घंटों। बाद में आप सामर्थ्यवान भी थे और कह दिए नहीं, तो उसका परिणाम आपको भोगना पड़ेगा। कोई बचा नहीं पाएगा।
किसी को आश्वासन देने से पहले आप यह तय कर लीजिए कि आप कर पाओगे या नहीं। आश्वासन ऐसा तो नहीं कि दबाव में दे रहे हो। क्यों दे रहे हो? इसलिए कि आप जितना तेजी से ऊपर उठोगे, उतना तेजी से गिरोगे भी। जैसे एक आदमी पैदल जा रहा है, अगर गिरेगा तो कम चोट लगेगी। एक आदमी साइकिल से जा रहा है, गिरेगा तो पैदल वाले से ज्यादा लगेगी। एक आदमी साइकिल छोड़कर बाइक से जा रहा है, तो उसको चोट साइकिल वाले से थोड़ी ज्यादा लगेगी। फिर फोर व्हीलर से जा रहा है, और बस, और कोई जहाज से जा रहा है, गिरेगा तो क्या होगा। कहने का मतलब है कि जिसकी आप जरूरतमंद की सेवा कर रहे हो, कोई सामान्य व्यक्ति है, कोई गुरु है, सबका अपना-अपना अधिकार है, सबकी अपनी-अपनी ऊर्जा है, सबकी अपनी-अपनी शक्ति है। जिसके साथ जैसा करते हो, जितना ऊपर तेजी से उठोगे, अगर आप उसे धोखा दिए तो उतना तेजी से आप गिरोगे भी। याद रखना। तो किसी को अगर आप आश्वासन देते हो तो जरूर अपने आप को जांच लो, क्या मैं उसे पूरा कर पाऊंगा, हां या ना।
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वीडियो: लाइव सत्संग अपनों की कुटिया में प्रश्न और उत्तर #योगी · 2026-07-16