आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P9-0029 · भाग 9

जिस काम को हम बिजनेस कहते हैं, उसमें अगर सही रेट के ऊपर थोड़ा चढ़ाकर लिख दें, तो अगला सही रेट नहीं देता। और अगर सामान ज्यादा चढ़ाकर लिख दें, तो वह कुछ कम करके देता है। कम करके देने के बाद मेरा जो लेवल है, वह हो जाता है। ज्यादा लिख देना सही है या गलत?

इसमें यह है कि ज्यादा अगर आपने लिख दिया है, और कोई कम करवाता है, कम करके, तो आप उस लेवल पर आ जाते हो। अगर कोई कम नहीं कराता, और आपने उसी लेवल का दे दिया, कि भैया तुमने कम नहीं करवाया, लेकिन देना मुझे इसी रेट में है, तो क्या करूं। व्यापार का एक तरीका है। लोगों में भ्रम फैल गया है। अगर सामर्थ्यवान हो, तो फिक्स रेट लगा दो। शुरू में प्रॉब्लम तो होगी, लेकिन बाद में सही हो जाएगा। फिक्स रेट, मैं इतना लेता हूं, फिक्स है मेरा। तो मैं तो कहूंगा, फिक्स रेट लगा दो। और अगर अब ऐसा समाज है, जहां पर आप काम करते हो, और फिक्स रेट नहीं लगा सकते, तो आपको देना इतने में है, यह पक्का कर लो। और आपने जितना ज्यादा लिखा है, कम कराते-कराते वहीं आ जाओ। अगर कोई बीच में भी रुक जाए, तो उसे आखिरी में उतना ही दो। आखिरी में उतना ही ले आओ, बाकी लौटा दो। अगर वह बीच में भाव भी न करे, कोई भाव भी नहीं करेगा, तो उसको पूरा उतना लाकर दो, कि भैया, इतने में मैं आपको दूंगा। क्योंकि ऐसा समाज है, इसी वजह से ऐसा है। अगर भाव न किया, तो आप उस मूल्य पर दे दो। तो बोल दो, भैया, भाव करने वाले के लिए मैंने ऐसा रखा है, बाकी मैं इसी रेट में ही देता हूं।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: Live के प्रश्न और उत्तर स्वयं के सामर्थ को जांच कर आगे बढ़े । #योगी · 2026-06-05