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प्रश्नोत्तर P8-0192 · भाग 8

शरीर को कर्मों का भोग आता है। उसे भोगना चाहिए क्या, या नहीं भोगना चाहिए?

भोगना तो होना चाहिए। लेकिन उचित तरीके से। अगर बीमारी आ गई, तो पहले जितना इलाज करना है, इलाज कराओ। नहीं तो फिर भोग सकते हो। जैसे रामकृष्ण परमहंस को कैंसर हुआ। तो जब वे भोजन कर रहे थे, तो उनकी आंखों से अश्रुधारा बह रही थी। तो शिष्यों ने कहा, गुरुदेव बर्दाश्त नहीं कर पा रहे। तो बोले, मैं इस मुंह से नहीं खा पा रहा हूं, तो मैं अनेक मुंह से निवाला कर रहा हूं, भोजन कर रहा हूं। तुम्हें तकलीफ की जरूरत नहीं है। लेकिन शिष्य थे, तो उन्होंने स्वामी विवेकानंद से प्रार्थना की कि मां से तुम सीधा बात करते हो, मां से कहो कि गुरु जी का कैंसर ठीक कर दें। तो मां के पास स्वामी विवेकानंद जाते हैं। कहते हैं, गुरु जी का कैंसर ठीक कर दो। बोलीं, अगर कैंसर मैं ठीक कर दूं, तो कैंसर के भोग के लिए फिर इसे आना पड़ेगा। तो मैं चाहती हूं कैंसर का भोग भोग के यह मोक्ष को प्राप्त हो जाए। अगर कैंसर बच गया, मैं तो ठीक कर सकती हूं, लेकिन यह गलत है, क्योंकि उसे फिर भोगना पड़ेगा। भोगना उसे पड़ेगा। फिर भी रामकृष्ण परमहंस ने इलाज करवाया। तो उचित तरीके से इलाज करवाओ। गलत सहारा मत लो। शक्ति का सहारा लेकर, तंत्र-मंत्र का सहारा लेकर इलाज मत कराओ। जैसे लक्ष्मण को बाण लगा। लक्ष्मण तो शेषनाग के अवतार माने जाते हैं। राम में ताकत थी, हनुमान में ताकत थी। हनुमान जी शंकर के रुद्र अवतार कहे जाते हैं। वे ठीक कर देते। लेकिन फिर भी संजीवन बूटी लाए, वैद्य बुलाया, उचित तरीके से इलाज कराया। तो अपने ऊपर अगर कोई भोग आता है, कुछ भी है, तो अगर उसका इलाज करा सकते हो तो इलाज कराओ। इलाज के बाद नहीं हो रहा है, तो उसको भोगना ही पड़ेगा। लेकिन तंत्र-मंत्र का सहारा लेकर अपने रोग को ठीक मत करो। नहीं तो आपको बाद में ज्यादा भोगना पड़ेगा। बात समझ गए?

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 26 अप्रैल 2026 #योगी · 2026-04-26